ये वादियां ये फिजाए बुला रही है तुम्हें!

भानु प्रकाश नेगी


देहरादून-चारधाम यात्रा में इस बार रिकार्ड यात्रियों के पधारने के बाद भले ही शीतकाल के लिए चारो धाम के पट बंद कर दिये गये हो लेकिन यहां आने वाले शैलानियों का शिलशिला अभी भी जारी है।देश और दुनियां में प्राकृतिक सौन्दर्य,शांत वातावरण,और स्वाथ्यवर्धक जलवायु के लिए विख्यात उत्तराखंड अब धीरे धीरे शीतकालीन पर्यटन के लिए भी तैयार होने लगा है। यूं तो यहां के खूबसूरत स्थलों ऑली,केदारकांठा,मसूरी,मनस्यारी,नैनीताल,मुक्तेश्वर,चोपता तुंगनाथ,हर्षिल,चकराता,कैसानी आदि में पर्यटकों का आना जाना उत्तर प्रदेश के समय से लगा हुआ है लेकिन अब राज्य सरकार इन पर्यटक स्थलों को विंटर टूरिज्म के तौर पर तैयार करने का खाका तैयार कर रही है।

औली, मसूरी और नैनीताल
औली,मसूरी और नैनीताल,प्राकृतिक शीतकालीन सौंदर्य परिदृश्य का एक मिश्रण है और शीतकालीन खेल प्रेमियों के लिए एक पसंदीदा स्थल है। यह स्थान लोगों को इस तरह आकर्षित करता जैसे आग की लपटे किसी पतंगे को आकर्षिक करती है। और, यदि आपने नहीं सुना है, तो इस जगह को देश के शीतकालीन वंडरलैंड के रूप में घोषित किया गया है! स्कीइंग इस जगह का समानार्थी है क्योंकि चिकनी भूमि ढलानें हैं और बर्फ से ढके पहाड़ों की पृष्ठभूमि है। यह बर्फ राष्ट्र नंदा देवी, कैमेट और माना जैसे हिमालयी पर्वत देखने के लिए एकदम सही ऊंचाई के रूप में भी कार्य करता है। और गढ़वाली व्यंजन को चखना न भूलें। निश्चित रूप से, हमें आपको यह बताने की जरूरत नहीं है कि आप बर्फ में पूरे दिन खेल सकते हैं, स्नोमैन बना सकते हैं या दूसरों पर स्नोबॉल फेंक सकते हैं, मेरा मतलब है, दोस्तों, रिश्तेदार या परिचित लोगों पर, न कि अजनबी लोगों पर। मेरा विश्वास करो यह कोई होली नहीं है, या आप बस अपने रहने की जगह पर सो सकते हैं। शीतकालीन सुबह की नींद दुनिया की सबसे अच्छी चीजों में से एक है।

दिल्ली से 530 किमी दूर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की बेरीनाग तहसील में स्थित चौकोरी एक छोटा सा पहाड़ी नगर है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 2010 मीटर है। चौकोरी के उत्तर में तिब्बत और दक्षिण में तराई क्षेत्र है। यह जगह भी पश्चिमी हिमालय की पर्वत श्रृंखला के पास स्थितकहते हैं देखने में सभी हिल स्टेशन एक जैसा होता है लेकिन हर पहाड़ की अपनी खूबसूरती होती है अगर बात चौकोरी की जाए तो उनकी बात ही अलग है एक तरफ जहां हरियाली से लकदक ऊंचे पहाड़ है तो दूसरी ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियां। सूरज की लालिमा इन बर्फ से ढके पहाड़ों पर पड़ती है तो लगता है मानों हम स्वर्ण देश में आ गए हैं। यहां का हर नजारा दिल को सुकून पहुंचाता है। शांत शीतल हवा शरीर में नई सुफूर्ति का संचार करती है। चौकारी की खूबसूरती को बयां करती।
चौकोरी की सुंदरता में मक्के के खेत और फल चार चांद लगाते हैं। चौकोरी में आने वाले यात्री उल्का देवी मंदिर में आकर नतमस्त हो सकते हैं। पिथौरागढ़-चंडक मोटर मार्ग पर टूरिस्ट रेस्टहाउस के पास यह मंदिर स्थित है। इसी तरह घनसेरा देवी मंदिर में विभिन्न भगवानों की पत्थर पर बनी सुंदर नक्काशी देखी जा सकती है।

पाताल भुवनेश्वर
पास के गाँव भुवनेश्वर में समुद्रतल से 1350मी. ऊपर स्थित पटल भुवनेश्वर, एक गुफा में बना हुआ मंदिर है। चूंकि प्राथमिक रूप से यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि इस गुफा में 33करोड़ देवी-देवताओं का निवास है।इस स्थान पर देश प्रदेश के पयर्टकों का जमावड़ा पूरे साल भर देखा जा सकता है।

गंगोलीहाट
गंगोलीहाट जगह हाट कलिका मंदिर नामक सिद्धपीठ के लिये प्रसिद्ध है। इस सिद्ध पीठ की स्थापना आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा की गयी। हाट कलिका देवी रणभूमि में गए जवानों की रक्षक मानी जाती है।

धरमघर
धरमघर चौकोरी से 9 किमी दूर है। गांधी जी के पगचिन्हों पर चलने वाली सरला बहन ने अपनी जिन्दगी के अन्तिम कुछ पल यहां पर ही गुजारे थे। धरमनगर में हिमदर्शन के नाम सरला बहन का एक कुटीर है। यहां से हिमालय पर्वत के चोटियों का नजारा दिखाई देता है।
कामाक्ष मंदिर और केदार मंदिर
कामाक्ष मंदिर और केदार मंदिर चौकोरी के अन्य प्रसिद्ध तीर्थ हैं। इस सुंदर हिल स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को गर्मियों अथवा सर्दियों के शुरुआती महीनों में आने का सुझाव दिया जाता है।

चौकोरी कैसे जाएं
उत्तराखंड के बड़े शहरों से चौकारी के लिए बसों की सुविधा उपलब्ध है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन है। यहां से चौकोरी के लिए टैक्सी सेवा उपलब्ध है। पंत नगर हवाई अड्डा चौकारी के सबसे नजदीक है। यहां से निजी तौर पर टैक्सी बुक की जा सकती है। चौकोरी की जलवायु गर्म और शीतोष्ण है। चौकोरी में सर्दियों में गर्मियों से बहुत कम वर्षा होती है। कोपेन-गीजर के अनुसार ब्ूइ जलवायु का वर्गीकरण है। चौकोरी का औसत वार्षिक तापमान 14.5 है. 1523 मिमी औसत वार्षिक वर्षा है।
आधुनिक सुख सुविधाओं से परे है चकराता
चकराता की खासियत यह है कि यह शहर अब तक आधुनिक सुख सुविधाओं से परे है। सबसे कम जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में आपको रहने के लिए होटल भी गिने चुने, 2 या 4 ही मिलेंगे। सेना की कड़ाई के वजह से भी इस क्षेत्र की खूबसूरती अब तक अनदेखी खूबसूरतियों में से एक है। उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर बसे होने के कारण चकराता की संस्कृति में हिमाचली संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। जौनसार-बावर क्षेत्र में बंटे चकराता के लोग बाहर से आने वाले की आव-भगत में कोई कसर नहीं छोड़ते।

भारी बर्फबारी
समुद्रतल से 2270 एमटीएस ऊंचाई पर स्थित चकराता देहरादून जिले की सबसे खूबसूरत जगह के रूप में जाना जाता है। यहां भारी बर्फबारी होती है। जिसके चलते यहां सैलानियों का जमावड़ा लगता है। चकराता जाने के लिए अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर का समय बेहतर है।

टाइगर फॉल
घूमने के लिहाज से चकराता से करीब 17 किमी की दूरी पर टाइगर फॉल बेहद सुंदर जगह है। यह फॉल इतना सुंदर है कि यहां से वापस आने का ही मन न करे। टाइगर फॉल तक पहुंचने के लिए आपको सड़क से करीब डेढ़ किमी पैदल खड़ी ढलान पर उतरना होगा। सड़क पर ही आपको यहां आसपास के गांवों के बच्चे मिल जाएंगे जो आपका सामान ढोने के लिए तत्पर रहते हैं। 100-200 रुपये में वे आपको वापस सड़क तक पहुंचा जाते हैं।

ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए बेस्ट
चकराता अपने शांत वातावरण और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से 7000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह नगर देहरादून 98 किलोमीटर दूर है। चकराता प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग में रुचि लेने वालों के लिए एकदम उपयुक्त स्थान है। यहाँ के सदाबहार शंकुवनों में दूर तक पैदल चलने का अपना ही मजा है।

बूढ़ेर
चकराता के पास ही बूढ़ेर है ये घास का बड़ा मैदान है। ये जगह ठंड के समय बर्फ से ढंक जाती है यहा आप ठंड के खेलों का भी आनंद उठा सकते है… यह मैदान देवदार के घने जंगलों से घिरा हुआ है जो एशिया के सबसे घने जंगलों में से एक है।

चिरमिरी
चिरमिरी चकराता मार्केट से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर है। यह क्षेत्र सूर्यास्त के नज़ारे का सबसे उत्तम दृश्य का अनुभव कराता है।

चोपता तुंगनाथ
भारत का स्वीटरजरलैण्ड कहा जाने वाला चोपता तुंगनाथ शीतकाल में बेहद खुबसूरत हो जाता है,बांज,बुरास,समेत कई प्रजाति के पेड़ो से आछादित यह क्षेत्र खूबसूरत ढलान और हिमालय दर्शन के साथ साथ भब्य प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्व है। इस स्थान पर शीतकाल में वर्फबारी के बाद पर्यटको को जमावडा लगा रहता है,लेकिन अधिक संख्या में यहां पर पर्यटकों आने पर यहां रहने की समस्या हो जाती है।क्योंकि यहां पर तापमान कई बार शुन्य से भी कम हो जाता है इस कारण बाहर रहने में समस्याये आ जाती है।चमोली जिला मुख्यालय से लगभग 38 किलामीटर की दूर पर स्थित यह बेहत खूबसूरत स्थल राज्य सरकार को होटल व्यवसाय को विकसित करने की आवश्यकता है।

केदारकांठा
उत्तरकाशी जनपद के सीमांत विकास खंड मोरी में जहां एक ओर कलाप गुफा, भ्रराडसर ताल, फूलों की घाटी हरकीदून व देवक्यारा हैं,वहीं केदारकांठा जैसे अनेक रमणीक बुग्याल, ताल व तीर्थ स्थल भी हैं। केदारकांठा धार्मिक व सांस्कृतिक स्थल होने के साथ-साथ मनोहारी पर्यटन स्थल भी है। समुद्रतल से 3810 मीटर और 12520 फीट की उचाई पर स्थित यह स्थल शीतकालीन खेलों का प्रमुख स्थल है दूरह क्षेत्र होने के बाबजूद भी यहां पर रहने व खाने के लिए होमस्टे की व्यवस्था है। यहां के स्थानीय लोगों के लिए यह खूबसूरत स्थल रोजगार का साधन हो सकता है यदि राज्य सरकार इन्हें कुछ सुविधाये उपलब्ध करा सकें।

उत्तराखंड में चारधाम के अलावा शीतकाल में भी पर्यटन व तीर्थाटन के कई स्थल है। जिनमें पर्यटक तो आना चाहता है लेकिन,सुखसविधा व प्रचार प्रसार के कारण शौलानी यहां आने से कतराते है। राज्य सरकार इस ओर काम तो कर रही है लेकिन अभी भी इस स्थलों पर बहुत सुविधाये पहुचाने की आवश्यकता हैं।शासन व प्रशासन इस ओर ध्यान देता है तो आने वाले समय में इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनायें है। जिससे न राज्य सरकार की आर्थिकी भी मजबूत होगी।