टी. वी.की बीमारी से जंग जारी है।क्या टी.वी. हारेगा?

भारत में 10 बड़ी प्राणघातक बीमारियां में सुमार टी बी का पूर्ण उन्मूलन सरकारों के लिए चुनौती बना हुआ है।संक्रामक होने के कारण यह बीमारी एक मरीज से दूसरे में तेजी से फैलती  जा रही है। इसका बायरस इतना सक्षम होता है कि 40 किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति को भी यह संक्रमण द्वारा फैल सकती है।हाॅलाकि भारत सरकार द्वारा डाॅटस कार्यक्रम चलाये जाने के बाद इसमें काफी कमी देखने को मिल रही है। उत्तराखंड मंे इस रोग की क्या स्थित है एक रिपोर्ट-


 पूरे विश्व के 27 प्रतिसत छय रोगी आज भी हमारे देश में मौजूद है।उत्तराखंड में टीबी के मरीजों की संख्या हर साल 25 हजार से अधिक होती है।जिसमें सरकारी व प्रायवेट सेन्टरों के मरीज सामिल है। पूर्व डायरेक्टर NHM  डाॅ अजीत गौराला का कहना है कि पहले टीबी के मरीजों की तादाद ज्यादा बड़ जाती थी क्योंकि हमारे पास इसकी दवा की कमी रहती थी,लेकिन जब से भारत सरकार का डाॅटस कार्यक्रम चला तब से मरीज को पूरी दवाई के साथ साथ आवश्यक प्रोटीन आदि के लिए 5सौ रूपया प्रति मरीज हर माह दिया जाता है। टीबी का पता लगाने के लिए बलगम की जांच आवश्यक है और मरीज को कम से कम 6 माह तक दवा लगतार लेनी होती है।


-वही टी0बी0 रोग की बात उत्तराखंड के संदर्भ की जाय तो यहां पर तम्बाकू और टीबी रोग का गहरा संबध है।पहाड़ी जिलांे में तंम्बाकू एक फैसन के तौर पर प्रयोग होता है,जिसके कारण ईम्युन सिस्टिम कमजोर होता और टीबी के बायरस शरीर में सक्रिय हो जाते है।लेकिन एक ताजा रिर्पाट में उत्तराखंड में तम्बाकू का प्रयोग 37 से 21 प्रतिसत आया है जो एक सुखद समाचार तो है लेकिन अभी इसे पूर्ण तरह से उन्मूलन होने में काफी समय लग सकता है।

– टीबी उन्मूलन के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय टी बी उन्मूलन कार्यक्रम में सहयोगी बने आशाकार्यक्रर्ती,स्यंमसेवी संस्थाऐ आपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।जिनके माध्यम से मरीज को दवायें और जांॅच निःशुल्क उपलब्ध होती है।फिर भी वर्ष 2018 में 4507 मरीज पब्लिक नोटिफाईड और 1380 पब्लिक नोटिफाईड थे। जिनमें सिर्फ 3 प्रतिसत रोगी ही डिफोल्टर निकले बाकी लोगों को पूर्व इलाज किया गया।

भले ही भारत सरकार ने टीबी के संपूर्ण उन्मूलन के लिए साल 2025 चुना हो, लेकिन जिस तादात में अभी भी टीबी मरीज बड रहे है,उससे तो यही लगता  िक इस कार्यक्रम में अभी कई और साल लग सकतें है जिसमें जन जागरूकता की भी आवश्यकता है।अब देखने वाली बात यह होगी कि इस गंभीर रोग को भगाने में सरकार कब तक कामयाब हो पाती है।
-भानु प्रकाश नेगी, देहरादून