भारत में होती है 40 प्रतिसत अन्न की बर्बादी….देखे खास रिपोर्ट

 

भानु प्रकाश नेगी


आज के समय में शादी पार्टी,या अन्य समारोह में खाने की बर्बादी आम बात हो गई है।लेकिन भोजन को कूडे दान में डालने से पहले यह कोई नहीं सोचता कि जिस भोजन को कूडे दान में डालने में हम एक मिनट भी नहीं लगातें वह कम से कम एक सौ पैन्तालीस दिन में तैयार होता है। जिसमें किसान का खून पसीना लगा होता है।क्या है पूरी खबर देखते है एक रिपोर्ट-

एक सर्वे के अनुसार हमारे देश में एक साल में जितना अन्न पैदा होता है,उसका लगभग 40 प्रतिसत हम किसी न किसी रूप में बर्बाद कर  देते है। अन्न की बर्बादी के लिए साल 2016 से जुटे समाज सेवी संदीप गुप्ता का कहना है। कि लोग पेट भर नहीं  प्लेट भर भोजन थाली में लेते है।जिसके कारण अनावश्यक भोजन कूडे में चला जाता है। जब मैने यह शिलसिला लगातार देखा तो मैने जानी अंजानी शादियों में जाकर पोस्टर लगाकर जागरूकता कार्यक्रम चलाना शुरू कर दिया जिस पर एक ही नारा होता है भोजन उतना ही लो थाली में व्यर्थ न जाय नाली में।वही सेवा बैंक से जुडे एडबोकेट विवेक शर्मा का कहना है कि शादी विवाह आदि आयोजनों में भोजन की बहुत बर्बादी देखते है।दूसरी तरफ निर्धन बच्चों को भोजन नहीं मिलता है।तब हमने समाजसेवी संदीप गुप्ता से प्रेरणा लेकर शादी आदि समारोह में लोगों को जागरूक करने का काम शुरू किया है।

भूखे को अन्न देने की परम्परा भारतीय समाज में सदियों से चली आ रही है। इससे सबसे बड़ा धर्म भी माना जाता है। रोटी बैंक संस्था के राकेश आनन्द का कहना है कि सनातन धर्म में अन्न को ब्रहम कहा गया है। अन्न को फेकना व कूडेदान में डालना बहुत गलत बात है।हमने अपने बहुत से सांस्कार छोड़ दिये है।इसलिए हमें यह देखने को मिलता है।लोगों को यह समझना होगा कि अन्न को फेकना नहीं चाहिए बल्कि किसी भूखे को देना चाहिए।हमें कई बार जन सेवा करने में सरकारी कानून तंग करते है। जिसके कारण कई सेवासदन बंद हो चुके है।

अनाज के एक एक दाने का क्या मोल होता है यह तो भूखे पेट वाला ही जान सकता है।समाजसेवा की मिसाल बने प्रधानाचार्य हुक्म सिंह उनियाल सैकडों अनाथ बच्चों का निःशुल्क छात्रावास चलाते है। उनका कहना है कि  जब मैने यह कार्यक्रम शुरू किया तो मै एक एक अन्न के दाने के लिए तरसता था।बच्चों के लिए अन्न जुटाना मेरे लिए एक बड़ी चुनौती थी।यह देखकर बहुत बुरा लगाता है कि शादी पार्टीयों में बहुत खाना बर्बाद होता है। पहले मेरे स्कूल में भी बच्चे खाना बर्बाद कर देते थे लेकिन बाद में मैने सख्ताई से नियम लागू किया कि उतना ही लो थाली में व्यर्थ न जाये थाली में। और आज एक भी दाना अन्न का बर्बाद नहीं होता है।

 एक तरफ आज भी लाखों लोगों को हमारे देश में एक टाईम का खाना भी नसीब नहीं होता है। वहीं आये दिन शादी पार्टी में सैकडों लोगों का खाना बर्बाद हो जाता है।इस बात को जमीनी तौर पर समझने की आवश्यकता है,कि खाना पेट भर खाया जाय न कि प्लेट भर भोजन लेकर आधा से अधिक कूडे़ दान में डाल दिया जाय। इस ओर सरकारों के कदम धीरे धीरे सख्ताई की ओर बड़ तो रहें है लेकिन जब तक जन जागरूकता नहीं होगी तब तक सफलता का स्तर काफी कम रहेगा।