उत्तराखंड के सीमान्त गांव में भी होगी इंटरनेट की सुविधा

केन्द्र सरकार के निर्देश के बाद बीएसएनएल उत्तराखंड में इंटरनेट सुविधाओं और मोबाइल नेटवर्क को मजबूत करने में जुट गया है। उत्तराखंड के सीमांत और दुर्गम गांवों में यू.एस.ओ. निधि द्वारा वित्तीय सहायता से मोबाइल टावरों की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही भारत नेट परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों और गांवों के लिए ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पर खास फोकस किया जा रहा है। बीएसएनएल ने हाल ही में राज्य के अंतिम गांव नीती घाटी के मलारी क्षेत्र में मोबाइल सेवाओं को स्थापित और लॉन्च किया है। उत्तराखंड के ग्यारह ब्लॉक जिनमे डुंडा (उत्तरकाशी), लोहाघाट (चंपावत), कालसी (देहरादून), दुगदा (पौड़ी गढ़वाल), खिर्सू (पौड़ी गढ़वाल), गदरपुर (उधम सिंह नगर), डोईवाला (देहरादून), पोखरी (चमोली), खानपुर (हरिद्वार), बागेश्वर और चंपावत शामिल हैं। उनमे 30 मोबाइल टावर्स के रोल आउट पर 4 जी परीक्षण जल्दी होने वाला है। यू.एस.ओ. परियोजना के तहत चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़, और उत्तरकाशी के सीमावर्ती क्षेत्रों में अट्ठाइस 4 जी मोबाइल टावर्स की योजना बनाई गई है। इनमें से 22 साइटों को अधिग्रहित किया जा चुका है और 11 स्थलों पर टॉवर स्थापना का काम चल रहा है। बीएसएनएल के सीजीएम सतीश शर्मा ने बताया उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी से हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा कर रहे अर्धसैनिक और रक्षा कर्मियों को अपने परिवार के संपर्क में रहने में मदद मिलेगी। उत्तराखंड के दूरदराज और कठिन क्षेत्रों में टेलीकॉम नेटवर्क में इस विस्तार के साथ, स्थानीय लोग टेली-मेडिसिन और टेली-शिक्षा और घर से काम करने सहित ई-सेवाओं का लाभ लेने के लिए 4 जी के उच्च गति डेटा नेटवर्क का उपयोग करने में सक्षम होंगे। इससे उत्तराखंड में तीर्थयात्रा, ट्रैकिंग और स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।