क्या पाया उत्तराखंड राज्य बना कर ?

20 साल का युवा उत्तराखंड
9 नवम्बर 2000 का जन्मा उत्तराखंड आज 20 वे वर्ष में प्रवेस कर चुका है।ये कहना ना इंसाफी होगी कि इन 19 सालों में प्रदेश में कुछ नही हुआ है। उत्तर प्रदेश के समय में राज्य के एक छोटे से काम के लिए भी लखनउ जाना पडता था अब देहरादून में ही वह सब हो जाता है।राज्य वासिंयों का उत्तर प्रदेश के जमाने में जहां मुख्यमंत्री पांच साल में एक बार देखने को मिलता था अब हर जिले में लगभग 3 या 4 माह में देखने को मिल जाता है भले ही लोगों की अपेक्षा के अनुसार काम न हो पा रहा हो।युवा उत्तराखंड इस वक्त अपने विकास को लेकर पूरी तरह से मचल रहा है। तीर्थाटन और पर्यटन के मिलन से यहां की तश्वीर और तकदीर चमक सकती है,जिसके लिए अब उत्तराखंड में सकारात्मक पहल हो रही है। मसूरी फिल्म कॉन्क्लेब से यहां पर बनने वाली फिल्मों में आने वाली समस्याओं का समाधान कर आने वाले समय में स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिलेगा साथ ही फिल्मसिटी के निमार्ण से स्वरोजगार के द्वार यहां पर खुलने जा रहे है।


लेकिन यह बात भी आयने की तरह साफ है कि उत्तराखंड के दूर दराज के गरीब परिवारों को आज भी तमाम बुनियादी सुविधाओं के आभाव में जीना पड रहा है। जिसके कारण यहां पर पलायन जैसी समस्या ने विकराल रूप धारण कर दिया है। गांव के गांव खाली होते जा रहे है,लिहाजा देश की अस्मिता पर खतरा बड़ता जा रहा है। दूसरी सबसे बडी समस्या राज्य के युवाओं को अभी भी छोटे से रोजगार के लिए भी दिल्ली मुम्बई समेत देश के अनेक राज्यों में जाना पड़ रहा है।स्वास्थ्य की लचर व्यवस्था के कारण पहाड़ी जिलों के अधिकतर अस्पताल रेफर सेंन्टर बने हुए है।पलायन के कारण परम्परागत खेती खत्म होती जा रही है, और जो किसान खेती कर रहे है वो जंगली जानवरों (सूवर,बंदरों) के आतंक से परेसान है।अधिकतर सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्रों के संख्या न्यूनतम स्तर पर पंहुच गई है जिसके कारण सैकड़ों स्कूलों को बंद करना पडा है। तेन्दुवा,भालू के हमले से आये दिन ग्रामीण अपनी जान गंवा रहे है।


देश और दुनियां में खूबसूरती का नायब नमूना उत्तराखंड में स्वरोजगार की भारी संभावनायें है। लेकिन जिस प्रदेश की 19 साल तक राजधानी तक न बन पाई हो उस प्रदेश के विकास का खाका क्या होगा यह चिन्तनीय पहलू है।शुरवाती समय में ही राजनीतिक अस्थिरता के कारण यहां के विकास का खाका नहीं खिच पाया निजि स्वार्थ के लिए नेताओं ने एक दूसरे की जमकर टांग खिचाई की और जनता के खून पसीने की कमाई की जमकर बंदरबांट की।………. बहरहाल कहानी बहुत लम्बी है।


लेकिन अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है राज्य में अभी भी सभी प्रकार की संभावनायें यहां पर बनी हुई है जिसमें साहासिक पर्यटन,तीर्थाटन,पर्यटन,जलबिधुत,मत्स्य पालन,मौन पालन, कुकुट पालन,बागवानी,जैविक खेती इतिआदि प्रमुख है। जरूरत इस बात की है कि युवाओं को प्रसिक्षण देकर छोटे छोटे स्वरोजगार के साधान उपलब्ध कराये जाये ताकि युवा गांव में ही अपना अपना रोजगार कर सकें।

भानु प्रकाश नेगी