शहर भर के पोलों पर उलझती इन तारों के लिए कौन है जिम्मेदार? पढें इस खास रिपोर्ट में !

भानु प्रकाश नेगी,देहरादून


सुन्दर आवोहवा और शांत वातारवरण के लिए प्रसिद् देहरादून शहर कितना बदरंग और भद्दा होता जा रहा है,यह बात किसी से छुपा नहीं है।यहां विभागों की हीला हवाली के चलते हर किसी को मनमर्जी करने की आदत सी पड़ गई है। लापरवाही का आलम यह है कि, बिजली के पोलों पर केबल ऑपरेटर, और टेलीफोन ऑपरेटर कई दशकों से अपनी तारे बाधतें जा रहे है। लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नही है नतीजतन आये दिन कोई ने कोई हादसा होता रहता है।
 इन उलझती हुई तारों के जाल को देखकर आपको लग रहा होगा कि यह किसी कारखाने में तैयार होने के लिए जा रही है। लेकिन अगर आप ऐसा सोच रहें है तो आप गलत है। दरअसल ये तारे केबल आपरेटरों,और टेलीफोन आपरेटरों द्वारा अनाधिकृत तरीके से लगाई गई है। जिनमें सार्ट सर्किट होने से बडे हादसे होते रहतें रहतें है।
इन उलझती तारो ने पूरे शहर को बदरंग करके रखा हुआ है। अव्यवस्था का आलम यह है,तारे खराब होने पर भी इन्हें यहां से बदला नहीं जाता है,बल्कि इन्हें बिजली के पोलो पर ही गुच्छा बना कर रख दिया जाता हैं। केबिल ऑपरेटरों की गुण्डागर्दी के चलते बेधड़ पोलों पर ये तारे लागाई जाती है,साथ ही इन पर केबिल के बाक्स भी टांक दिये जाते है,लेकिन इनकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी केबिल ऑपरेटर तैयार नही है। वही बिजली विभाग की माने तो,पहले इनके लिए कोई नीति नहीं थी लेकिन अब कोई भी आदमी बिजली के पोलों पर बिना इजाजत के तार नहीं टांक सकता है,उसके लिए प्रत्येक पोल के हिसाब से पेमेंट जमा करना होता है।अधिकारियों को तार हटाने के निदेश दे दिये गये है।वही आम आदमी का कहना है कि इन उलझती हुई तारों से लोगों की जान और माल का खतरा बना रहता है,इन्हें यहां से हटाना चाहिए।
 उलझती तारें से होने वाले हादसों से सबक लेने के लिए न तो विभाग संवेदनशील है और नहीं केवल ऑपरेटर। बिजली विभाग जहां संबंधित विभागों पर कार्यवाही करने की बात करते है लेकिन अभी तक कार्यवाही धरातल पर देखने को नहीं मिलती है,अब देखने वाली बात यह होगी कब विभाग की नींद से जागते है।