तीर्थाटन और पर्यटन का संगम कार्तिक स्वामी मंदिर-भानु प्रकाश नेगी

           रूद्रप्रयाग
समूचा उत्तराखंड ही तीर्थाटन और पर्यटन की दृष्टि से भरपूर है। प्रकृति ने अपार सौर्न्दय यहां बिखेरा है,हिमाआक्षादित अनेक पर्वत श्रृखलायें,हजारों किलोमीटर में फैले मखमली बुग्याल,पर्वतों की गोद से निकलते मनमोहक झरने,दूर-दूर तक फैले हरे-भरे जंगल और उनसे बहने वाले मंद-मंद पवन न सिर्फ मनुष्यों को बल्कि देवताओं को भी यहां आक्रर्षित करती आयी है, इसीलिए इस भू-भाग को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहां के स्थान-स्थान पर स्थित देवी देवताओं के मंदिर यह सावित करते है कि,यहां के कण-कण में देवी- देवताओं का वास है। इन्ही मंदिरों में एक खास मंदिर भगवान कार्तिकेय का भी है, जो रूद्रप्रयाग जिले के कनकचौरी नामक स्थान में क्रौच पर्वत पर स्थित है।


उत्तर भारत में भगवान कार्तिकेय का यह एक मात्र मंदिर है। पुराणो के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों (कार्तिकेय,व गणेश) से कहा कि जो ब्राहमाण्ड की सबसे पहले परिक्रमा करके आयेगा वह माता पिता की पूजा  का प्रथम अवसर प्राप्त करेगा। श्री गणेश शिव जी के दूसरे पुत्र थे उनके लिए शिव ही ब्रहामाण्ड थे, अतः उन्होने माता-पिता की परिक्रमा कर प्रतियोगिता जीत ली। कार्तिकेय भगवान पूरे ब्रहमाण्ड का भ्रमण करके आये तब वे यह सुनकर बहुत क्रोधित हुये कि गणेश जी ने यह अधिकार बिना ब्रहमाण्ड की परिक्रमा करके ही जीत ली। उन्होनें अपने शरीर की हड्डियां अपने पिता जी व मांस अपनी माता पार्वती को दे दिया. ये हड्डियो आज भी मंदिर में मौजूद है। जिन्हें हजारों भक्त अभी भी पूजते है। भगवान कार्तिकेय उसके बाद क्रौच पर्वत पर क्रौच नामक राक्षस को मार कर स्यंम यहां विराजे।

कार्तिक स्वामी का मंदिर में रूद्रप्रयाग शहर से 38 किलोमीटर की दूरी पर कनकचौरी से 3 किमी की टै्रकिंग द्वारा पंहुचा जा सकता है। यह मार्ग रूद्रप्रयाग पोखरी मार्ग पर स्थित है।पूर्व सरकारों के घोर अपेक्षा के चलते इस मंदिर में अभी तक मूलभूत सुविधायें भी व्यवस्थित तौर पर नही है। मंदिर परिसर में लगभग तीन किलामीटर की दूरी से खच्चरों द्वारा पानी पंहुचाया जाता है, और बिजली के लिए एक बारीक तार से काम चलाया जा रहा है। मंदिर तक पहुँचने  के लिए आधे से अधिक रास्ता कच्चा है मंदिर में सौर्दयीकरण का  काम उस स्तर पर नही हुआ है, जिस स्तर पर होना चाहिए। पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील होने के बावजूद भी यहां पर देवी-देवताओं के लिए चडने वाले प्रसाद व अन्य सामानों को खुले स्थानों पर जगह जगह डाल दिया जाता है जिसके कारण पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है।

उत्तर भारत में कार्तिक स्वामी मंदिर  भारत का  एक मात्र मंदिर है लिहाजा यहां देश के हर कोने से यात्री आता है। दक्षिण भारत में कार्तिक स्वामी के काफी अनुयायी है। लिहाजा यहां पर तीर्थ यात्री यहां पर आये दिन आते रहते है। सरकारों की बेरूखी व स्थानीय प्रबन्धन की कमी के चलते यहां पर यात्रियों को उचित रहने व ठहरने की व्यवस्था नही है। कार्तिकेय मंदिर समिति के अध्यक्ष शत्रुधन सिंह नेगी का कहना है कि सरकारी तंत्र की उपेक्षाओं के कारण यह क्षेत्र इतना प्रसिद्व व विकसित नही हो पाया जितना होना चाहिए था। जिसके कारण स्थानीय लोगों को रोजगार नही मिल पा रहा है। मंदिर में बिजली और पानी जैसी मूलभूत समस्याओं की भी उचित व्यवस्था नही है। मंदिर समिति का पूरा प्रयास है कि क्षेत्रीय जनता के सहयोग से कार्तिकेय धाम को विकसित किया जायेगा। वही मंदिर समिति के सचिव  बलराम नेगी  का कहना है कि मंदिर में सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नही करायी गई है लेकिन मंदिर समिति की ओर से यात्रियों के लिए हर प्रकार की सुविधा देने का प्रयास किया गया है। सदस्य प्रदीप राणा का कहना है कि सरकार की उपक्षाओं के कारण जन-सुविधाओं का काफी आभाव है,मूलभूत समस्याओं में पानी,बिजली,शौचालय के साथ-साथ रहने और खाने की उचित व्यवस्था नही है। जिससे यात्रियों को काफी परेसानियां का सामना करना पढ रहा है। यात्रियों के यहां न ठहर पाने के कारण मंदिर समिति व स्थानीय लोगो को आर्थिक नुकासान पंहुच रहा है।

कार्तिक स्वामी मंदिर के आस-पास का विहंगम दृश्य अति मनोरम व दर्शनीय है यहां आकर यात्री प्रकृति के नैसगिंक सौर्न्दंय में ऐसा खो जाता है कि उसे यहां से जाने का मन ही नही करता। यह स्थान तीर्थटन के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी उपयुक्त स्थान है.यहां पर सहासिक पर्यटन की बहुत संभावनायें है, जिसमें टै्रकिंग,रॉक क्लाइविग,स्काई फालाईग,पैराग्लाडिंग आदि की असीमित संभावनायें है। सरकार और स्थानीय लोगो के सहयोग से इस स्थान की कायाकल्प की जा सकती है जिससे सैकडों बेरोजगारों को  रोजगार मिलेगा और पलायन पर कुछ रोक लग पायेगी।