शिक्षक उपेन्द्र सती की सजगता ने बाल विवाह की शिकार नाबालिक बालिका को दिया पुनःशिक्षादान

-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून

चमोली जनपद के अन्र्तगत पोखरी व्लाक के खन्नी ग्राम सभा में एक 14 वर्षीय नाबालिक लड़की की शादी कलयुगी पिता द्वारा चंद रूपयों के लालच में जबरन एक 25 वर्षीय युवक के साथ करने का मामला संज्ञान में आया है। अनुसूचित बस्ती बनखुरी की यह नाबालिक बालिका राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिशंकर में 8वी की छात्रा है। यह मामला तब संज्ञान में आया जब कोरोना लाॅकडाउन के बाद विद्यालय पुनः खुला। स्कूल के अध्यापक उपेन्द्र सती द्वारा जब इस बालिका की कुछ दिनों तक ढूॅड खोज की गई तो पता चला की उसके पिता ने उसे कुछ रूपयों के लालच में एक युवक से शादी कर दी। कुछ दिन मौज मस्ती के बाद तथाकथित पति ने बालिका की पिटाई करना शुरू किया तो वह मायके में रहने लगी। शिक्षक उपेन्द्र सती ने जब उसे स्कूल आने और पढाई लिखाई का जिम्मा उठाने की जिम्मेदारी ली तो डरी सहमी यह बालिका स्कूल आने को तैयार हुई।
जागरूक शिक्षक उपेन्द्र सती की इस नेक कार्य के लिए सोशल मीडिया पर हर जगह तारीफ हो रही है। वही उपेन्द्र सती ने आंशका व्यक्त की है कि हमारे समाज में विशेषकर पर्वतीय जिलों के गंाॅवों में इस तरह की अबोध बच्चियांे को बेचने और दुराचार के मामले बड़ी संख्या में बे रोक टोक चल रहे है। समाज के कुछ दुश्मनों ने इसे धन्धा बना लिया है। इस तरह के मामलों का तुरंत संज्ञान लेकर रिपोट दर्ज कर बाल शोषण व महिला उत्पीड़न कानूनों के अन्र्तगत कार्यवाही होनी चाहिए। साथ ही मीडिया व न्यायालय को भी इस तरह के गंभीर अपराधिक मामलों का संज्ञान लेने की आवश्यकता है। ताकि त्वरित व प्रभावी कार्यवाही हो सके।
हमारे समाज में इस तरह के कुकृत्य की यह पहली घटना नहीं है,बल्कि इस तरह के गिरोह काफी सक्रियता के साथ पहाड़ के दूर दराज के गांवों के गरीब व लाचार घरांे की बेटियों को चंद रूपयों के लालच मंे शादी का झांसा देकर अपने साथ ले जाते हैं और कुछ समय बाद इन्हें बेच कर या इन्हें अपंग बनाकर भीख मंगवाने का काम करते है। सवाल पुलिस प्रशासन पर भी उठते है कि इस तरह की घटनाओं और कृत्यों का इन्हें कैसे पता नहीं चलता? या पुलिस प्रसाशन सब कुछ जानते हुए भी मौन रहता है? जबकि अगर पुलिस अलर्ट हो तो इस प्रकार के जघंन्य अपराध किसी भी हालत में नही हो सकतें है।
शिक्षक उपेन्द्र सती द्वारा किया गया यह कार्य वाकिह काबिले तारिफ है,आखिर उन्होंने एक सच्चे,जागरूक शिक्षक का फर्ज निभाया है। आज के समय में जहां शिक्षक समाज सुधारक के काम को छोड़ तमाम प्रकार के उल्टे सीधे कामों में व्यस्त दिखते है,वही उपेन्द्र ने अपना फर्ज निभाकर सच्चे शिक्षक की भूमिका निभाई है। इस तरह के समाजसेवी शिक्षकों को समाज में सम्मानित किया जाना आवश्यक हैं। ताकि अन्य लोग भी इनसे प्रेरणा ले सकें