डॉ.राजे नेगी शिक्षक न होकर भी निभा रहे है शिक्षक का धर्म .

40 जरूरत मंद बच्चों को मिल रही है निःशुल्क शिक्षा.
-लोकभाषा व संस्कृति से जोड़ मिल रही है संस्कारवान शिक्षा.
-1रूपया रोजना व अखबार की रद्दी लेकर चला रहे है स्कूल.


                      
जीवन में शिक्षा का क्या महत्व है यह बताने की आवश्यकता नही है।समाज में जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है।शिक्षक समाज का वह दीपक होता है जो खुद जलकर दूसरों को प्रकाश देता है।भले ही आज के आधुनिक समय में शिक्षा का स्वरूप और शिक्षकों की मर्यादायाओं ने कई बार सीमायें लांधने का प्रयास किया हो लेकिन शिक्षक और शिक्षा के मायने आज आधुनिक युग में भी कम नही हुए हैं।

शिक्षक दिवस के अवसर पर उन शिक्षकों को नमन है जो शिक्षक न होने के बावजूद भी सेवा और समाज के प्रति समर्पण भाव से गरीब और जरूरत मंदों को संस्कार व संस्कृति से जुड़ी शिक्षा प्रदान कर रहे है। इन्ही में से एक है वरिष्ठ समाजसेवी नेत्र सर्जन डॉ़ राजे नेगी। डॉ राजे नेगी ने अप्रैल 2015 में अपने दो साथी रमेश लिंगवाल और उत्तम सिंह असवाल के साथ मिलकर अनूठे निःशुल्क शिक्षण संस्थान “उड़ान“ संस्था की स्थापना कर शिक्षा के व्यवसायी करण करने वालों को आयना दिखाया है।

आम जनता से र्सिफ एक रूपया रोजाना और अखबारों की रद्दी के सहयोग से शुरू किये गये इस स्कूल में एडमिसन करने बाले बच्चों की प्राथमिक शर्त झूग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चे है। स्कूल में र्सिफ गरीब वर्ग के बच्चों को ही प्रवेश दिया जाता है। संस्कारवान शिक्षा व संस्कृति के लिए समर्पित इस अनूठे स्कूल में प्रार्थना भी लोकभाषा गढवाली में की जाती है। साथ ही लोकभाषा भी अनिवार्य रूप पढ़ाई जाती है। वर्तमान समय में इस स्कूल में 40 बच्चे अध्यनरत है। जिनके लिए 4 शिक्षिकायें भी नियुक्त की गई स्कूल में प्रोजक्टर से अधिकतर पढाई करायी जाती है साथ ही लोकभाषा की बाल फिल्में भी दिखाई जाती है। कम्प्युटर की शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद सांस्कृतिक कार्यक्रम भी समय-समय पर किये जाते हैं। स्कूल में बच्चों को स्कूल ड्रेस,पाठ्यक्रम की आवश्यक वस्तुयें भी मुहया करायी जाती है। डॉ.राजे नेगी व्यवसाय से नेत्र सर्जन होने के बावजूद स्कूल में बच्चों को समय-समय पर कक्षायें भी देते है। उड़ान स्कूल के इस उत्कृष्ठ कार्यो के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। शिक्षक दिवस पर ऐसे समाजसेवी शिक्षकों को सत सत नमन।

  -भानु प्रकाश नेगी,Dehradun


निशुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान स्कूल मायाकुंड ने धूम धाम से मनाया शिक्षक दिवस
निशुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान स्कूल मायाकुंड में शिक्षक दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर भारत के प्रथम उप राष्ट्पति डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णानन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया गया।

स्कूल के निदेशक डॉ राजे नेगी ने कहा कि डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णानान जी कहते थे कि शिक्षा का अर्थ केवल जानकारी और कुछ गुण प्राप्त करना नहीं,बल्कि यह दूसरों की मदद करने के लिए है। वह चाहते थे कि शिक्षा का उद्देश्य भगवान के नजदीक पहुंचने का होना चाहिए। शिक्षा के द्वारा वह लोगो में बराबरी लाने के लिए वर्ग रहित समाज की स्थापना करना चाहते थे।शिक्षा ने हमें दूसरा जन्म दिया है ताकि हम इस बात का अहसास हो कि हमारे पास पहले से क्या है, शिक्षा का मतलब व्यक्ति को स्वतंत्र करना है और हमें चाहिए की संपूर्ण व्यक्तित्व शारीरिक,मानसिक,बौद्धिक और आध्यात्मिक में शिक्षा का समावेश हो। बिना आध्यात्मिक ज्ञान के किसी भी व्यक्ति का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास नहीं हो सकता। डॉ नेगी ने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान संभव नहीं है इसलिए हमें सदैव अपने गुरुओं के प्रति आदर एवं सम्मान का भाव रखना चाहिए।

स्कूली बच्चों द्वारा एस मौके पर अपनी शिक्षकाओ को ग्रीटिंग्स एवं पन उपहार स्वरूप भेंट किए गए। इस अवसर पर स्कूल प्रबन्धक रमेश लिंगवाल,संजीव सेमवाल,संदीप सेमवाल,उत्तम असवाल,रवि कुकरेती,आशुतोष कुडियाल,प्रियंका कुकरेती,प्रिया क्षेत्री,मीनाक्षी राना,मंजू देवी मौजूद रहे।