2024 तक छय रोग मुक्त उत्तराखंड का लक्ष्य

भानु प्रकाश नेगी

देहरादून-छय रोग काफी पुराना रोग है। इसे तपेदिक रोग के नाम से भी जाना जाता है। इस रोग के बारे में जागरूकता के लिए विश्वभर में हर साल 24 मार्च को छय रोग मनाया जंाता हैं। विश्व के विकसित देशों में यह रोग लगभग समाप्त हो चुका है लेकिन भारत भी अब इस रोग के उन्मूलन की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए देश के हर राज्य में डाॅट्स के माध्यम से टीबी के रोगियों खोज से लेकर सम्पूर्ण इलाज व खुराक भारत सरकार द्वारा मुक्त दी जाती है। टीबी भी कोरोना की तरह संक्रमित रोग है यह रोग संक्रमित व्यक्ति से अन्य लोगांे में फैलता है। जानवरों के द्वारा भी यह आम इंसान में फैलता है। इस रोग में तीन सप्ताह तक खांसी,सांयकाल का बुखार,और बलगम के साथ खून आने के साथ-साथ भूख न लगना व वजन कम होना खास लक्षण है। देश में लगभग 7 करो़ड़ लोग अभी भी इस रोग से ग्रसित हैं जिसमें से प्रत्येक वर्ष 25 से 30 लाख लोगों की मौत इस रोग से हो जाती है। राहत की बात यह है, समय से इस रोग का पता लगने से इसका पक्का और प्रभावी इलाज मौजूद है। बच्चों को इस रोग से बचाने के लिए बचपन में ही तपेदिक का टीका लगाया जाता है।
बात अगर उत्तराखंड की करी जाय तो यहां पर 20 हजार टीबी के रोगी वर्तमान समय में मौजूद है,जिसमें से 16 हजार का इलाज चल रहा है और 4 हजार लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके है। उत्तराखंड में इस रोग के उन्मूलन के लिए 2024 का लक्ष्य रखा गया है।