अगर आप सिगरेट और तम्बाकू के शौकीन है तो आप के लिए ये खबर ख़ास है


 

-तम्बाकू मुक्ति के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में जन जागरूकता अभियान जारी

-सैकडों लोग करा चुके है अब तक निःशुल्क जांच 

– तम्बाकू एवं धुम्रपान से पीड़ित कई मरीजों का चल रहा है अस्पताल में उपचार

पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में हर महीने की दस तारिख को तम्बाकू निवारण के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया जाता है। जिसमें अभी तक मरीजों को लाभ पहुंचाया जा चुका है। जैसे-जैसे लोगों को इस कार्यक्रम का पता चलता है वैसे- वैसे यह मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। अस्पताल के सीएमएस डॉ.एल.सी पुनेठा का कहना है कि हमारी कोशिस है कि प्रदेश के अधिक से अधिक तम्बाकू से ग्रसित मरीजों की निःशुल्क जांच हो और उनका जल्द से जल्द किफायती दरों पर इलाज शुरू किया जा सके। क्योंकि अस्पताल में अब जन-औषधि केन्द्र के खुल जाने से यहां आने वाले मरीजों को सस्ती दरों पर दवाईयों उपलब्ध हो रही है और गरीब से गरीब आदमी भी अपना इलाज करा सकता है।

अस्पताल के बरिष्ट फिजिसियन डॉ. अजीत गौरोला के अनुसार तम्बाकू इंसान की जिन्दगी में धीरे-धीरे जहर घोलता है। जो बाद में जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है जिसमें फेफडे,लीबर,कीडनी,आंतों आदि में कैन्सर हो जाता है साथ ही हार्ट अटैक, बीपी समेत मानसिंक रोग होने की प्रबल संम्भावनायें रहती है। हमारा उद्देश लोगों में धुम्रपान,व तम्बाकू से होने वाले रोगों के बारे में जागरूक करना है,ताकि उन्हें समय पर इलाज मिल सके और वे अपनी जिन्दगी को तम्बाकू से दूर रख सकें। धुम्रपान से न सिर्फ एक व्यक्ति को  नुकासान होता है, बल्कि जो उसके सम्पर्क में होता है, उसे भी नुकसान होता है। 

वही अस्पताल के बरिष्ट फिजिसियन, एम.डी मेडिसिन डॉ. एन.एस बिष्ट का कहना है कि तम्बाकू सेवन की आदत बच्चों को टीन ऐज में शौक-शौक में ंदोस्तों के साथ में लग जाती है धीरे-धीरे यह निकोटीन हमारे शरीर में फैलने लगता है और हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पंहुचाना शुरू कर देता है। जिसका नतीजा सिर्फ मौत होती है। अकेले सिगरेट में मौजूद 4000 से अधिक रासायनिक तत्त पाये जाते है,जिनमें 22 प्रकार के अति बिषैले तत्व होते है। जो हमारी दिल और दिमाग पर सीधे तौर पर असर करते है।डॉ. बिष्ट के अनुसार तम्बाकू हमारे प्रजजन क्षमता में भी बुरा असर डालते है,इससे इंसान नपुंसक तक हो जाता है।

अकेले भारत में तम्बाकू और smooking करने से होने वाली बीमारियों से करोडों लोगों की जान चली जाती है।जिससे मरने वाले के परिवार पर आर्थिक संकट आ जाता है। साथ ही बीमारी के दौरान उसकी छुटटी से देश की आर्थिक उन्नित में अवरोध पैदा होता है। ात की जाय अगर उत्तराखंड की तो यहां भी धुम्रपान करने से होने वाली मौतों आंकडा भी कम नही है। सबसे बडी चिन्ता की बात है कि भारत का अधिकतर युवा वर्ग नसे और धुम्रपान की चपेट में है। जिसे सिर्फ जागरूकता फैलाकर ही कम किया जा सकता है।उत्तराखंड में यह आंकडॉ 37 प्रतिसत है जिसमें लगभग 12 प्रतिसत युवा 19 प्रतिसत बुर्जग, और 7 प्रतिसत महिलायें।

                                                 –  भानु प्रकाश नेगी