पहाड़ो में दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाओं का एक नमूना, झूला पुल पर दिया बच्ची को जन्म।

झूला पुल पर जन्मी लाडो
देवभूमि में तुम्हारा स्वागत है।
-क्या खूब रंग ला रही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की मुहिम
देहरादून से 85 किलोमीटर की दूरी पर है त्यूणी। त्यूणी बाजार के झूला पुल पर मंगलवार अलसायी सुबह एक नवजात बच्ची ने जब दुनिया में आंख खोली तो उसे मंद-मंद बह रही ठंडी बयार के साथ जरूर एहसास हुआ होगा कि यह एक बेरहम दुनिया है जहां एक मध्यम वर्ग और उससे भी कम वर्ग के बच्चे के लिए कदम-कदम पर ठोकरें हैं। हां, लाडो, तुमने जिस झुला पुल पर जन्म लिया, तो समस्त ताकतें तुम्हारे जन्म के खिलाफ थी, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का राग अलापती है। ये एक जुमला है और याद रखना तुमने जुमलों की दुनिया में आंखें खोली हैं। अभी तो तुम्हारा जन्म भी नहीं हुआ कि तुम्हें न डाक्टर मिला न अस्पताल, लेकिन यह तो शुरूआत भर है। जैसे-जैसे तुम बड़ी होगी, मुश्किलें भी तुम्हारे साथ बड़ी होंगी। दिन ब दिन। घर, स्कूल और कालेज और समाज भी। कदम-कदम पर खतरे और चुनौतियां। हां लाडो, तुम्हें जन्म से जीवन पर्यंत इन्हीं खतरों और चुनौतियों में अपनी खुशियां तलाशनी होंगी, अपने हिस्से का आसमां ढूंढना होगा, यदि डर गयी तो फिर पैरों में बेड़ियां होंगी और जिस तरह तुमने तमाम झंझावात का सामना कर खुले आसमां के नीचे झूला पुल पर जन्म लेकर साहस का परिचय दिया उसी तरह आगे बढ़ती रही तो सफलता और दुनिया तेरे कदमों में होगी। तूने खुले आसमां के नीचे जन्म लेकर व्यवस्था के मुंह पर तमाचा मारा है और उम्मीद है कि तेरी ये हिम्मत जीवन की तमाम मुश्किलों पर भारी पड़ेगी।
गौरतलब है कि उत्तरकाशी के आराकोट की प्रसवपीड़ा से ग्रस्त वनिता को जब त्यूणी अस्पताल में डाक्टर नहीं मिला तो उसने त्यूणी बाजार के झूला पुल में बेटी को जन्म दिया।

गुणानंन्द जखमोला