हीड्रोपॉनिक विधि से सब्जी उत्पादन, स्वरोजगार की असीमित सम्भावनाये

भानु प्रकाष नेगी,

हाईड्रोपोनिक विधि बनी रोजगार का साधन
बेरोजगारी देषभर में बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। बात अगर विशम भौगोलिक परिस्थितियो वाले उत्तराखंड राज्य की करें तो यहां पलायन के मुख्य कारण में बेरोजगारी भी एक कारण है।21 वी सदी के बदलते डिजीटल व कम्प्युटरी करण से भी बेरोजगारी की समस्या लगातार बड़ती जा रही है। सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों में नौकरी न होने के करण युवाओं के लिए सिर्फ स्वरोजगार ही एक मात्र विकल्प बच जाता है।स्वरोजगार से किस प्रकार से युवाओं को रोजगार मिले इसके लिए दिल्ली से नौकरी छोड़ भानियावाला के एक युवक गणेष ने अपने ही घर में स्वरोजगार का साधन खोला है।
क्या है हाईड्रोपानिक विधि
हाईड्रोपोनिक विधि में पौधों को गमले,प्लास्टिक की थैली,या खाली वर्तन आदि में कम से कम स्थान पर बिना मिट्टी के पानी में साग-षब्जी उगाई जाती है। इस विधि में पौधों के आवष्यक तत्वों को पानी में ही मिला दिया जाता है। यह विधि पूर्णरूप से जैविक विधि है।
कास्तकार गणेष बने बेरोजगारों के लिए प्रेरक
मन में कुछ अलग करने की चाह हो मंजिल मिल ही जाती है। स्वरोजगार की सीख सीखते गणेष विश्ट मूल रूप से पौडी गढवाल का रहने वाला है। दिल्ली में प्राइवेट नौकरी के दौरान एक हादसे में गम्भीर चोट के बाद कम्प्यूटर चलाने में असर्मथ हो गया।एक साल अस्तपाल में गुजारने के बाद भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने ही घर में हाईड्रोपोनिक विधि से साग सब्जी के पौधे उगाकर स्वरोजगार की ठानी,गणेष का कहना है कि डगर तो कठिन थी लेकिन मैने हिम्मत नहीं हारी और ठान लिया कि इसी को अपना रोजगार का साधन बनाउगा। इसके लिए उन्होंने चण्डीगढ में प्रसिक्षण लिया और अपने ही घर में छोटे से पॉलीहाउस में हाईड्रोपोनिक विधि से पौधे उगाने षुरू कर दिए जिनमें,पहाडी,खीरा,भिण्डी,राई,फ्रासविन्स,ब्रोकली आदि प्रमुख है। बिना मिट्टी के उगाये जाने वाले इन पौधों की सबसे खास बात यह है कि इनमें पौधों के लिए जरूरी पोशक तत्वों को पानी में मिला लिया जाता है।जिसमें आद्रता,व तापमान का विषेश ध्यान रखा जाता हैं। जैविक विधि से उगाये जाने के कारण इनकी कीमत अजैविक साग,सब्जी से तीन से चार गुना गुना अधिक ज्यादा होती है।
स्वरोजगार करने वाले युवाओं के लिए स्वार्णिम अवसर
कास्तकार गणेष का कहना उत्तराखण्ड में बेरोजगारी के चलते युवा दिल्ली,मुम्बई जैसे महानगरों का रूख कर रहें जिसमें उन्हें घंटो महेनत के बाद चद रूप्ये मिलते है। यदि युवा स्वरोजगार अपनाये तो इस रोजगार से एक से ढेड लाख रूपये तक घर बैठे कमा सकतें है। हाईड्रोपोनिक विधि सस्ती और कारगार है जिसमें कम समय में ज्यादा धन कमाया जा सकता है।
क्या कहते है विषेशज्ञ?
पूर्व उद्यान निदेषक डॉ बीर सिंह की माने तो इसमें लम्बे समय तक चलने वाले पौधों को उगाया जाता है। जिसका सामान्य उत्पादन एक अनुपात तीन में होता है। इसलिए यह विधि काफी कारगर है। यह देष के कई राज्यों के अलावा विदेषों में भी की जा रही है। उत्तराखंड समेंत देष के युवाओं के यह स्वारोजगार का महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।
रोजगार की तलास में दर दर भटक रहे युवाओं के लिए हाईड्रापोनिक विधि वरदान साबित हो सकती है बषर्ते युवा सरकारी व गैर सरकारी नौकरियों के लिए इंतजार करने के बजाए षिक्षित बेरोजगार युवा हाईड्रोपोनिक विधि से  स्व-रोजगार अपनायें तो खुद के रोजगार के साथ-साथ देष की आर्थिक तरक्की में भी भागीदार हो सकते है।