स्वाईन फ्लू के कारण और बचाव जाने वरिष्ट फिजिसीयन डॉ. बी.एस.चौहान से।

सर्दी के मौसम में स्वाईन फ्लू के वायरस की सक्रियता के कारण,संक्रमण का काफी खतरा बड़ गया है,उत्तराखंड में अभी तक 17 मरीज इस बीमारी से संक्रमित हो चुके है,जिसमें से दो मरीजों की मौत हो चुकी है,लगातार बड रही संक्रमणता के कारण लोगों में इसका काफी खौफ भी देखने को मिल रहा है जिसके कारण हल्का सा सर्दी जुखाम,बुखार होने पर लोग डॉक्टरों की सलाह ले रहे है। स्वाईन फ्लू के क्या है प्रमुख कारण और इसे कैसे बचा जा सकता है इस पर कोरोनेसन अस्पताल के बरिष्ट फिजीसियन डॉ.वी.एस. चौहान का कहना है,कि स्वाईन फ्लू एक तरह का वायरल इन्फेसन है,जो जुखाम,खासी की तरह प्रजेन्ट करता है,छींक आना,जुखाम लगना,बुखार आना,सांस लेने में परेसानियां होना,कई बार खास के साथ खून भी इसमें आता है,मरीज में ज्यादा स्थिति नाजुक होने पर टेस्ट किये जाते है,टेस्ट पॉजिटिव होने पर स्वाईन फूलू का ट्रीटमेंट दिया जाता है साथ ही एन्टीवायोटिक दवायें दी जाती है। कई बार मरीज को सांस की मशीन पर भी रखा जाता है।

बचाव के तौर पर भीड़ भाड़ में नही जाना चाहिए,स्वाईन फ्लू से इफेक्टेड मरीज के आस पास नही जाना चाहिए,और नहीं हाथ मिलाना या नजदीक रहना चाहिए, मुहूं पर मास्क लगाना चाहिए,और अगर किसी को भी इस तरह के लक्षण होते है तो तुरन्तु डॉक्टर से सर्म्पक करना चाहिए।ठंड के मौसम में यह बायरस सक्रिय हो जाता है,इसलिए इस मौसम में इस रोग से बचने के आवश्यकता है।

भानु प्रकाश नेगी, देहरादून।