राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोंगिता में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए  प्रतिभाशाली खिलाडियों का चयन।

राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोंगिता में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए  प्रतिभाशाली खिलाडियों का चयन

माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तराखंड द्वारा पहली बार आयोजित राज्य स्तरीय अन्डर 14,17,19 बालक बालिका हॉकी प्रतियोंगिता में तीनों ग्रुपों के 10- 10 प्रतिभाशाली खिलाडियों का चयन हुआ है।राज्य के विभिन्न जिलों से रायपुर रोड़ स्थित महाराणा प्रताप र्स्पोटस कॉलेज पंहुची कई टीमों ने जमकर अपनी प्रतिभा का प्रर्दशन किया। जिसमें सर्वश्रेष्ठ प्रर्दशन करने वाली टीमों  के 10-10 खिलाडियों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर हाने वाली प्रतियोगिता के लिए किया गया है।
हॉकी कोच पंकज टम्टा व महेश्वरदत्त गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों से आये खिलाड़ियों को पहली बार हॉकी की टर्फ पर खेलने को मिला है जिससे बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चे जोश व पूरी ताकत के साथ खेल रहे है। उत्तराखंड में अभी एक ही हॉकी की टर्फ है। जिसमें खेल कर अभी तक लगभग 500 खिलाडी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा ध्यान अडंर 14 टीम पर दिया जाना चाहिए उन्हें लगातार टर्फ पर ही प्रैक्टिस करानी होगी ताकि अडंर 17 और 19 तक पंहुचने पर  वह सर्वश्रेष्ठ प्रर्दशन कर सकेगा। हॉकी की टर्फ हर जिले में होनी आवश्यक है ताकि प्रतिभावन खिलाडियों को अभ्यास का मौका मिल सकें और राज्य में सर्वश्रेष्ठ खिलाडी देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।
https://youtu.be/MMsM1a6Ls2s

वही राज्य भर से आये कई खिलाडियों का कहना है कि हम अभी तक घास के मैदान में ही हॉकी खेला करते थे,यहां पहली बार टर्फ पर हॉकी खेलने का मौका मिला तो खेलने का जोश और जज्बा दुगुना हो गया है। अगर हमें खेलने के लिए हॉकी की टर्फ मिल जाय तो हम भी अपनी प्रतिभा का लोहा देश और दुनियां में मनवा सकते है।


भारत का राष्ट्रीय खेल आज भी क्यों उस स्तर पर नही है।उत्तराखंड के परिपेक्ष में हॉकी में प्रतिभाशाली खिलाडी संर्धष ही कर रहें भले ही राज्य सरकार ने राज्य में पहला हॉकी का टर्फ तैयार कर  खिलाडियों को प्रोतसाहित करने की मंसा तो जताई है लेकिन जब तक प्रत्येक जिले में एक या दो हॉकी टर्फ तैयार नही होगी और उनके लिए योग्य कोच और खिलाडियों को संतुलित आहार न ही मिलेगा तब तक हॉकी  का भविष्य उत्तराखंड में सुनहरा नही माना नही माना जा सकता है।जिसके लिए सरकार के साथ साथ आर्थिक रूप से सम्मन्न लोगों   व समाज सेवियों एवं सस्थाओं को आगे आने की आवश्यकता है।
भानु प्रकाश नेगी, देहरादून