पुराने वाहनों पर स्पीड गर्वनर के विरोध में टैक्सी यूनियनों का विरोध जारी, यात्री परेसान।

-पुराने वाहनों पर स्पीड गर्वनर के विरोध में टैक्सी यूनियनों का विरोध जारी यात्री बेहाल।

-मामला कोर्ट में, टैक्सी यूनियनों ने सरकार पर लगाया उत्पीड़न का आरोप।


  //भानु प्रकाश नेगी,देहरादून//

पुराने वाहनों पर स्पीड गर्वनर की अनिवार्यता के विरोध में टैक्सी-मैक्सी यूनियनों की हड़ताल चौथे दिन जारी रही समूचे उत्तराखंड में टैक्सी यूनियनों ने सरकार का पूतला फूक जमकर नारेबाजे और सड़कों पर झलूस निकाले।इससे पहले प्रदेश भर के टैक्सी ड्राईवरों ने विरोध में अपने अपने गाडियों के कागज स्थानीय आर टीओ और  डीएम एसडीएम कार्यालय में जमा करायें। टैक्सी यूनियनों का कहना कि लम्बे समय से पुराने वाहनों पर विशेष तौर पर पहाड़ी जनपदों में चलने वाले वाहनों पर स्पीड गर्वनर की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग सरकार से  जा रही थी लेकिन सरकार ने अपना फैसला नही बदला इसलिए टैक्सी यूनियनों को हडताल करनी पडी।


नागभूमि टैक्सी यूनियन पोखरी नागनाथ के महाबीर सिंह चौधरी का कहना है कि पहाडों में चलने वाली गाडियों में स्पीड गर्वनर के लगने से गाडियों का माईलेज कम हो जायेगा।साथ ही पुरानी गाडियों पर स्पीड गर्वनर लगाने से फायदे की जगह नुकासान है क्योकि पुरानी गाडियां वैसे ही माईलेज नही देती और स्पीड एक लिमिट में होने से गाडी चालकों को भारी नुकसान उठाना पड सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने हर तरह के नियम व्यवसायिक गाडियों के लिए लागू कर दिये है प्रायवेट गाडियां मनमानी सवारी लेकर टैक्सियों का काम कर रही है लेकिन उनके लिए कोई रोक टोक नही है।लेकिन हमारी गाडी में एक भी सवारी ज्यादा होती है। तो चालक का लाईसेंन्स तीन महीने के लिए निरस्त किया जा रहा है। यह सब हमारे साथ अन्याय हो रहा है।



 कर्णप्रयाग टैक्सी यूनियन सचिव राजेश खत्री का कहना है कि जिस ईजीनियर ने ये गाडियां बनाई हैं उन्होनें इस पर यह स्पीड गर्वनर नही लगाया क्योंकि इसकी आवश्यकता इसमें नही थी लेकिन राज्य और केन्द्र सरकार जान बूझकर हम पर यह नियम थोप कर हमें आर्थिक नुकसान पंहुचाना चाहती है। हम पर सरकार यह जबरदस्ती इसलिए थोप रही कि हम हर साल अपनी गाडियों की फिटनिस करने आरटीओं जाते है तो वह जबरदस्ती हम से कहते है कि स्पीड गर्वनर लगाओं तभी फिटनिस होगी। सरकार ने चोरी का रास्ता अपनाया हुआ है 10 सीट की गाडी में आठ से ज्यादा सवारी पाये जाने पर सीधे हमारा लाईसेंस तीन महीने के लिए निरस्त किया जा रहा है अगर लाईसेन्स निरस्त नही करना है तो सीधे 1000 रूपये की मांग पुलिस द्वारा की जाती है। यह काम आटीओं की जगह पुलिस को दे दिया गया है जो हमारा शोषण कर रहे है।


टैक्सी यूनियन प्रधान गौचर बीरसिंह का कहना है कि स्पीड गर्वनर की अनिवार्यता सरकार द्वारा जबरदस्ती थोपी जा रही है।जिसका पुरानी गाडियों पर अनावस्यक खर्चा है।विरोध में वाहन चालकों ने अपने गाडियों के कागज जमा कराने शुरू कर दिये है जिसमें अभी तक 600 डाईवरों के तीन महीने के लाईसेन्स रदद हो चुके है। विरोध में 1400 से भी अधिक लोगों ने अकेले चमोली जिलें में अपने गाडियों के कागज आटीओं व डीएम ,एसडीएम कार्यालय में जमा करा दिये है। बाकी जिलों में भी यह सिलसिला जारी है।


नागभूमि टैक्सी यूनियन के उपाध्यक्ष बलबीर सिंह चौधरी का कहना है कि पुराने गाडियों में स्पीड गर्वनर लगाना घाटे का सौदा है इसमें लगभग 35 हजार रूपये तक का खर्चा आ रहा है और हर साल के का टैक्स अलग। स्पीड गर्वनर नई गाडियों में लग कर आ रहा है उसका विरोध नही है लेकिन पुरानी गाडियों में सरकार इसे जबरदस्ती लगवाना चाहती है जो टैक्सी मालिकों के साथ अन्याय है।साथ ही टैक्सी यूनियन इस बात का भी विरोध करती है कि जो गाडियों में 10 सीट में पास है उनमें एक सवारी भी अधिक होने पर चालक का लाइसेंन्स तीन महीने के निरस्त किया जा रहा है जिससे चालक के परिवार पर रोजी रोटी का संकट आ रहा है।


वही राज्य सरकार का कहना है कि यह मामला अब कोर्ट में चला गया है और जब तक कोर्ट का कोई फैसला नही आया या केन्द्र सरकार के कोई दिशा निर्देश नही मिले तब तक कुछ भी नही किया जा सकता है।


बहरहाल टैक्सी महासंघ का एक प्रतिनिधि मंडल कोर्ट की शरण में न्याय की गुहार लगाने गया है,लेकिन इसमें  अभी एक सप्ताह का समय लग सकता है। तब तक टैक्सी यूनियनों की हड़तालें जारी रह सकती है। जिससे आम जनता की मस्किलें आने वाले दिनों में और बड़ सकती है। टैक्सी यूनियनों की हड़ताल से एक ओर आम आदमी परेसान है वही दूसरी ओर रोजना की मजदूरी करने वाले चालको को भी रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है साथ ही सबसे ज्यादा परेसानियां पर्वतीय जिलों में ब्रांच सड़कों पर वाहनों की आवाजाही न होने से ग्रामीणों को  रोजमर्रा के सामान के लिए भी खासी परेसानियां हो रही है।


वाहन चालक चलती गाडी में करते है मोबाईल फोन का अत्याधिक प्रयोग।


आजकल एक रोजाना गाडियों में सफर करने वाले यात्रीयों से एक शिकायत लगातार सुनने को मिल रही है कि टैक्सी मैक्सी चालक चलती गाडियों में मोबाईल फोन का इस्तेमाल कर रहे है। जिससे दुर्धटना के अत्याधिक आसार बन जाते है। यात्रियों का कहना है कि सुरक्षा व सुविधा की वजह से वे टैक्सी में ज्यादा किराया देकर सफर करते है लेकिन जब वही इसमें नही मिलगी तो इनमें सफर करने का कोई फायदा नही है। पहाडों पर गाड़ी चलते वक्त गाडी चलाते वक्त ज्यादा खतरनाख होता है क्योंकि फोन करते वक्त जरा सा ध्यान भटकने पर गाडी सीधे खाई में जा गिरती है जिसका दोषी सिर्फ चालक ही होता है। कुछ यात्रियां ने इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री एप करने की धमकी तक दी है।