स्मार्ट फोन की मधुर यादे खो रहे है हम! //भानु प्रकाश नेगी//

सोशल मीडिया के बडते दुस्प्रभाव

भले ही भारत जैसे विकासशील देश में आजादी के 70 साल बाद भी करोडों लोगों को भरपेट खाना नशीब न हो रहा हो लेकिन सूचना क्रांति के तेजी से बदलते दौर ने लगभग हर भारतीय के पास मल्टीमीडिया फोन पंहुचा दिया है। सूचना क्रांति के आधुनिक युग में मल्टीमीडिया फोन ने सूचना तंत्र को बहुत तेजी से आगे बढाया है। रिलायंस कम्पनी के जियो सिम कार्ड लॉच होने के बाद अधिकतर उपभोक्ताओं को फ्री इंटरनेट,कॉल,एसएमएस,बीडियो कॉल आदि से सोशल मीडिया का प्रचलन तेजी से आगे बडा दिया।रिलायंस कम्पनी के फ्री सिम के बाद सभी टेलीकॉम कम्पनियां को अपने डाटा पैक के साथ-साथ कॉल रेट भी मजबूरन घटने पडें, जिसका नतीजा यह हुआ कि सोशल मीडिया खास कर फेसबुक और वॉटसअप का प्रचलन बिजली की गति से बड गया क्योंकि पहले पूरे महीने 3जी की स्पीड से एक या दो जीबी डाटा उपयोग होता था लेकिन अब लगभग 200 के पैकेज में डाटा,कॉल,विडियों कॉल के लिए हर दिन डेढ से दो जीबी डाटा 4जी मिलता है, जिसके कारण सूचना की तेजी के साथ साथ कई अपराधों को भी जन्म मिला मिला है। देश के कई राज्यों से अफवा फैलाने के कारण बच्चा चोरी के आरोप में कई बेकसूर लोगों को पब्लिक ने मार-मार कर जान ले ली। स्मार्ट फोन से डेन्जर जोन में सेल्फी ने अभी तक हजारों लोग अपनी जान गंवा बैठे है।

स्मार्ट फोन की मधुर यादे खो रहे है हम!

स्मार्ट फोन से फोटो बीडियों बनाकर अपने पास सहजने की हम कई कोसिस करते है लेकिन हम कामयाब नही रहते, कारण हमारे फोन की मेमोरी व चिप में इतना स्थान नही होता है कि हर बीडियों और फोटो को लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। इंटरनेट के कारण मोबाईल फोन में वायरस, व टूटने,गिरने,खो जाने के कारण मघुर पल की यादे खो जाती है और हमारे पास पछतावे के अलावा कुछ नही बचता है। ़पहले के समय में जब रील से या डिजिटल कैमरे से फोटों खीची जाती थी तो उस समय हम उसे प्रिंट करके बचा लेते थे और पुराने समय की फोटो आज भी हमें बीते समय की मुधर यादों का अहसास करती है। डिजिटल कैमरे और मोबाईल फोन उसी वक्त फोटो बीडियों दिखने से उसकी उपयोगिता को हम महत्वपूर्ण नही समझते जिसके कारण भविष्य में हम अपनी सुख दुख के पलों को खोते जा रहे है।

मल्टीमीडिया ने छीना करोडों लोगों का रोजगार

जब से मल्टीमीडिया फोन और इंटरनेट सस्ते दरों पर उपलब्घ हुआ है। तब से छोटे कैमरे से लेकर बडे कैमरे बनाने बाले कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पडा है।टॉर्च,घडी,कैल्कुलेटर,टीबी,रेडियों,टेपरिकार्डर,स्पीकर आदि कम्पनियां को भारी नुकसान हुआ साथ ही लाखों लोग बेरोजगार भी हुये है।

सोशल मीडिया की अपराध बढाने में सक्रिय भूमिका

मल्टीमीडिया फोन और उस में सोशल मीडिया लगभग हर हाथ में पंहुचने के कारण इसका प्रयोग हर अच्छी चीजों के साथ-साथ बुरी चीजों के लिए भी किया जाने लगा है। एक और जहां सोशल मीडिया के कारण कई जधन्य अपराध करने वाले अपराधी सलाखों के पीछे है वही एक रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों ने पत्थर बाजी का सारा खेल वॉटसअप के जरिये खेला है जो बदस्तूर अभी तक जारी है। इंटरनेट सेवा सस्ती होने के कारण असमाजिक तत्व हर दिन अफवा वाली खबरों को फैला देते है,जिसमें उनका पूरा ग्रुप सामिल होता है। अफवाहों के कारण देश में अभ्ां तक कई बेकसूरो की जान जा चुकी है।

सोशल मीडिया पर नियंत्रण जरूरी

सोशल मीडिया के कारण दिन प्रतिंदन अपराधों का ग्राफ बडता जा रहा है, जो पुलिस प्रसाशन के लिए सिरदर्द बना हुआ है रहा है। क्योंकि बॉटसअप पर ग्रुप में एक बार मैसेज आने के बाद वह शेयर हो जाता है और बायरल होने के बाद जल्दी से पता नही चल पाता कि मैसेज कहां से आया और किसने किया। हॉलकि अब पुलिस प्रशासन हरकत में आया है, लेकिन अभी भी बहुत सक्रियता के साथ नियंत्रण करना जरूरी है, ताकि भविष्य में होने वाली अपराधिक घटनाओं पर काबू पाया जा सके।