उत्तरकाशी के देवजानी व जीवाणु गांव में नही एक भी शौचालय,खुले में शौच करने को मजबूर ग्रामीण।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में सुमार स्वच्छ भारत अभियान पर भले ही राज्य सरकार पूर्ण शौचालय मुक्त उत्तराखंड का दावा कर रही हो लेकिन हकीकत कुछ और सामने आयी है। उत्तराकाशी के देवजानी व जीवाणु गांव  जहां गांव में अभी तक एक भी शौचालय नही है। यहां तक कि ग्राम प्रधान विमला देवी घर शौचालय नही है।सर बडियागार घाटी की ग्राम पंचायत सर के तीन गांव धिगाडी,सर और छानिका में केवल दो शौचालय है। इन स्थानों पर माध्यमिक तक शिक्षा की व्यवस्था भी नही है। अभी भी इन गांवों के छात्र-छात्राओं को राजगढ़ी,पुरोला,व बड़कोट में किराये के मकानों में रह कर पढाई करनी पढती है।
साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 50 किलोमीटर दूर पुरोला में स्थित है।बडियार घाटी के आठ गांवों के लिए सिर्फ चार बेड का आयुर्वेदिक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे चल रहा है। जहां पीने का पानी व शौचालय तक भी नही है। चार धाम यात्रा मार्ग होने के बावजूद भी यहां के लोग पेयजल के लिए पूर्ण रूप से प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर है। साथ ही सर बडियार के ग्रामीणों को राजगढी गंगतोडी तक 10 किमी.से अधिक की दूरी पैदल घने जंगलों और नदियों को पार कर पंहुचना होता है। यहां संचार की भी कोई सुविधा नही है।
यह बात हॉल ही में इन स्थानों की यात्रा कर दून पंहुचे पलायन एक चिंतन के संयोजक रतन असवाल ने देहरादून में एक प्रेस वार्ता के दौरान कही।
 पत्रकारों को संबोधित करते हुए असवाल ने कहा कि नये नये पर्यटक स्थलों को खोजने और उन्हें चिन्हित कर गांवों मे रोजगार विकसित करने का हमारा अभियान लगातार जारी है।इस अभियान में हमें सफलता भी मिल रही है। इस वर्ष हम देवजानी से केदारकांठा एक नया ट्रेक सामने लाने में काययाब रहे है।
टै्किंग दल में रतन असवाल,विजयपाल रावत,नेत्रपाल यादव,विनोद मुसान,इन्द्र सिंह नेगी,सिद्धार्थ रावत,दलबीर रावत,जितेश,प्रणेश,असवाल,सौरभ असवाल,सुनील कंडवाल,प्रवीन कुमार भट्ट,तनुजा जोशी सामिल थे।
-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून।