महंत इन्दिरेश अस्पताल में 6 से 8 घण्टे  में स्वाइन फ्लू सैम्पल की जांच रिपोर्ट.

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 6 से 8 घण्टे
में पाएं स्वाइन फ्लू सैम्पल की जांच रिपोर्ट.
 स्वाइन फ्लू की आहट के मद्देनज़र श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल प्रबन्धन ने कसी कमर.
 अस्पताल में आरक्षित किया संदिग्ध रोगियों के लिए वार्ड.
देहरादून। देहरादून में स्वाइन फ्लू की आहट के मद््देनज़र श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल प्रबन्धन ने एहतियातन पहल की है। अस्पताल में 12 बैडेड एक वार्ड स्वाइन फ्लू रोगियों के लिए आरक्षित कर लिया गया है। मेडिसिन विभाग के डॉ जगदीश रावत को स्वाइन फ्लू नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। संदिग्ध मामलों की देखरेख एवम् उपचार के लिए अस्पताल प्रबन्धन द्वारा विशेष गाइडलाइन जारी की गई है। यह जानकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ विनय राय ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए दी। काबिलेगौर है कि हाल ही में कुछ मरीज़़ स्वाइन फ्लू पॉजीटिव पाए गए हैं। इसके बाद इस बात की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि राज्य में स्वाइन फ्लू के और भी मामले निकट भविष्य में सामने आएं।
शनिवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से रूबरू होते हुए चिकित्सा अधीक्षक डॉ विनय राय ने कहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज़ के अन्तर्गत संचालित मौलीक्यूलर लैब में स्वाइन फ्लू सैम्पल परीक्षण लैब संचालित है। ऐसे मरीज़ जिनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई दें वे अस्पताल में डॉक्टरों से सम्पर्क कर सकते हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सैम्पल लेकर सैम्पलों को परीक्षण के लिए लैब भेजा जाएगा। उत्तराखण्ड व आसपास के राज्यों के अस्पतालों में आने वाले स्वाइन फ्लू के संदिग्ध रोगियों के सैम्पलों को उस अस्पताल के प्रतिनिधि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल प्रबन्धन से सम्पर्क कर सैम्पल लैब तक पहुंचा सकते हैं।
काबिलेगौर है कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की सेंट्रल मोलीक्यूलर रिसर्च लैबोरेटरी, नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज कंट्रोल, (एनसीडीसी) नई दिल्ली से प्रमाणित उत्तराखण्ड का एकमात्र अधिकृत सेंटर है। इसमें स्वाइन फ्लू (एच1एन1) सैम्पलों के जांच एवम् परीक्षण की सम्पूर्णं सुविधा उपलब्ध है। नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज कंट्रोल नई दिल्ली द्वारा निर्धारित सभी गाइडलाइन व मापदण्डों को पूरा करने के बाद लैब को अनुमति प्रदान की गई है। लैब को स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भी स्वीकृति प्राप्त है।
अस्पताल की सेंट्रल मोलीक्यूलर रिसर्च लैबोरेटरी डीएनए/आरएनए स्तर की जांच करने वाला राज्य का एकमात्र सर्टिफाइड सेंटर है। यह मरीजों़ं के लिए बड़ी राहत की बात है कि वे दून में ही स्वाइन फ्लू जांच हेतु सैम्पल अपने शहर में ही दे सकते हैं व
6 से 8 घण्टे में सैम्पल की रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। सेंट्रल मोलीक्यूलर रिसर्च लैबोरेटरी के इंचार्ज डॉ नरोत्तम शर्मा ने बताया कि उत्तराखण्ड के सरकारी व प्राईवेट अस्पतालों के मरीजों के सैम्पल भी परीक्षण के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की स्वाइन फ्लू लैब में लाए जा सकते हैं। देहरादून में हमारी लैब होने का बड़ा फायदा मरीज़ों को मिल रहा है। लैब के माध्यम से मरीज को जल्दी रिपोर्ट मिलेगी, यदि किसी मरीज़ के सैम्पल में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होती है तो जल्द इलाज शुरू हो पाएगा। स्वाइन फ्लू की लैब रिपोर्ट देरी से मिलने के कारण कई मामलों में मरीज़ की जान का जोखिम बन जाता है या मरीज़ को अपनी जान गंवाकर रिपोर्ट लेट आने की कीमत चुकानी पड़ रही है। हालिया मामले में भी यह बात खुलकर सामने आई है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की लैब में अत्याधुनिक उपकरण व हाई-क्वालीफाइड स्टाफ होने के की वजह 6 से 8 घण्टे में स्वाइन स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट मिल रही है। लैब में स्थापित हाई-टेक मशीन में एक बार में 100 सैम्पल एक साथ स्वाइन फ्लू टेस्टिंग के लिए लगाए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग से हुआ है पत्राचार
सेंट्रल मोलीक्यूलर रिसर्च लैबोरेटरी के इंचार्ज डॉ नरोत्तम शर्मा ने जानकारी दी कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में सरकारी व गैर सरकारी सभी प्रकार के अस्पताल स्वाइन फ्लू जांच के लिए सैम्पल भेज सकते हैं। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल प्रबन्धन इस सन्दर्भ में स्वास्थ्य विभाग के साथ कई बार पत्राचार कर चुका है। उत्तराखण्ड के सरकारी अस्पतालों में एकत्रित स्वाइन फ्लू सैम्पलों को किन नियमों व शर्तां के अन्तर्गत श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल लैब में टेस्टिंग के लिए भेजा जा सकता है, फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य विभाग में विचाराधीन है। पिछले साल भी उत्ताराखण्ड में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के मद््देनजर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल प्रबन्धन ने स्वास्थ्य विभाग उत्तराखण्ड को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। यदि इस दिशा में दोनों संस्थान हाथ मिला लेते हैं तो निश्चित तौर पर स्वाइन फ्लू रोगियों को सैम्पल परीक्षण में बड़ी राहत मिलेगी।