देवभूमि के लाल आचार्य शिव प्रसाद ममगाई की कथा वाचन चण्डीगढ़ में शुरू।

-भव्य कलश यात्रा के साथ देवी भागवत  प्रारम्भ।

–  ऊचे व  शांतिमय विचारों के  लिये  सादगी आवश्यक

चण्ड़ीगढः जब तक हमारी आवश्यकतायें  परमित नहीं होगी वे निरंतर बढती रहेगी, हमें दिन रात  उनकी पूर्ति के लिये विविध प्रयत्न में लगा रहेगा। जीवन सुख प्राप्ति के लिये हाय-हाय करता बीत जायेगा परंतु यदि हम  शिव के रहन- सहन से थोडी सी शिक्षा लेकर अपने भोजन प्राप्ति की आवश्यकता को परमित रखने की चेष्टा करेंगे तो उसकी पूर्ति थोडे से कम से पूरी हो जायेगी।

उक्त विचार ज्योतिषपीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद मंमगाई ने चड़ीगढ सेक्टर 35- बी  में आयोजित  श्रीमद् भागवत  पुराण में व्यक्त करते हुये कहा की भौतिकवाद के नशे में उन्नत तथा दान वैभव व एशवर्य  के मोह जाल में फंसे हुये लोगों पर सहज ही यह आशा नही की जा सकती  कि यह उपदेश  पर अभी सम्यक ध्यान देंगे  यह मानव को भगवान होने के लिये  विवस करेगी।शिवस्वरुप  आत्मा की शिव तत्व के साथ  एकता करके इन्द्रियों का  निग्रह करना चर्चा करना  भस्म धारण करना  है। क्योंकि शिव के ज्ञान चक्षु के द्वारा काम को भस्म किया,वैराग्य धर्म समता आदि के अभ्यास को  तमोगुण रजोगुण आदि के विकारों को  पराभूत और सदगुरु योगाभ्यास से स्वयं नाड़ी

में समता के भाव को शिव पार्वती कहते हैं।  भारत ऐसा देश है जहाँ  संस्कार ही सम्पति है । जबकि पश्चिमी देश की  कु शिक्षा के कारण यहाँ संस्कारों की कमी है।

गौर तलब है कि आचार्य शिव प्रसाद ममगाई कथा वाचन के लिए न सिर्फ देश मे बल्कि विश्व के अनेक देशों में विख्यात है।अभी तक हजारों कथायें का वाचन कर चुके है।इनकी वाकपटूता के कारण कथा सुनने के लिए लोग दूर दूर से कथास्थलों में पंहुचते है।

इस अवसर पर विशेष आचार्य रतनमणि सेमल्टी, ऋषि राम बाबा ,लालदयाल प्रंबध कमेठी के सी.डी. ए आदि लोग मौजूद रहे।

-भानु प्रकाश नेगी ,देहरादून