सेल्फी ने ले ली जान!

 // भानु प्रकाश नेगी//

4 जी इन्टरनेट और मल्टीमीडिया फोन आने के बाद भारत जैसे बहुआवादी वाले देश में मोबाइल फोनों का क्रेज बडता जा रहा है। भले ही मल्टीमीडिया फोन आने के बाद सूचना क्रांति में चत्मकारी परिवर्तन आये हो लेकिन इसके जो दुस्प्ररिणाम अभी तक सामने आये है वह हैरत में डालने वाले है। भारत में सेल्फी लगातार एक महामारी का रूप लेती जा रही है सेल्फी के चक्कर में अभी तक हजारों लागों को अपनी जान गवानी पडी है,जिसका शिलसिला लगातार जारी है।


खुद देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सेल्फी के इतने शौकीन है कि मौका मिलते ही वह सेल्फी लेने से नही चुकते। इस बाबत एक बार चुनाव के दौरान वोट देने के बाद वह पार्टी के चुनाव निसान कमल के साथ सेल्फी लेते हुये नजर आये। जिस पर चुनाव आयोग से उन्हे नोटिस भी जारी हुआ था।


युवाओं में बडते सेल्फी के क्रेज ने अब महामारी का रूप धारण कर दिया है। युवतियों में इस बीमारी ने ऐसी छाप छोडी है कि डेंजर जोन पर भी सेल्फी लेने से नही चुकते। मनोबैज्ञानिक डाॅक्टरों के अनुसार सेल्फी आम आदमी में लगातार मन का रोग बनता जा रहा है। आवश्यकता से अधिक फोन पर बात करने और इंटरनेट का प्रयोग करने से कई प्रकार के मानसिक रोग लोगों में देखे जा रहे है। जिससे चिडचिडापन,सिरदर्द आदि रोग हो रहे है जो धीरे- धीरे गंम्भीर बीमारी का रूप ले लेते है।

गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय के बरिष्ट नेत्र सर्जन डाॅ बीसी रमोला के अनुसार लगातार मल्टीमीडिया फोन को उपयोग करने और कम रोशनी में इसका उपयोग करने पर आंख पर बुरा प्रभाव पडता है, जिससे उपभोक्ता अंधा भी हो सकता है। बच्चों को विशेष रूप से मल्टीमीडिया फोन से दूर रखने की आवश्कता है ताकि इनकी आंखों पर बुरा प्रभाव न पड सकें।