सरकार के इस फैसले से क्यो खुश नहीं है कलाकार?

राज्य निर्माण के बाद उत्तराखंड में स्थापित संस्कृति निदेशालय चर्चा का विषय बना रहा। यहा पर हमेसा से ही चंद लोक कलाकारों को छोड़ लोक कलाकारों की तोहीन ही हुई है। वर्तमान समय में लोक कलाकारों के मानदेय में की गई मामूली वृद्वि हुई है,लेकिन लोक कलाकार इस मामूली बृद्वि से खुश नजर नही आ रहे है। प्रसिद्व जौनसारी लोककलाकर बाबूराम शर्मा का कहना है कि 400 से 600 की राशि बहुत कम है हमें अपनी टीम के कलाकरों का भुकतान कार्यक्रम की समाप्ति के तुरन्तु बाद करना होता है चाहे हम कहीं से भी लाकर दे।

जबकि हमारा भुगतान संस्कृति विभाग तीन साल के बाद करता है। हमारी स्थित एक मजदूर से भी बद्तर होती जा रही है। वही सुप्रसिद्व लोकगायिका रेखा धस्माना कहना है कि यह राशि न काफी है संस्कृति विभाग ने पुराने कलाकरों का किसी प्रकार का कोई ख्याल नही रखा है।

राज्य स्थापना दिवस पर सीएम रावत ने कलाकारों का मानदेय 400 रूपये से बड़ाकर 600 रूपये करने की घोषणा की थी,जबकि इनके दल नायक का मानदेय 600 से बढ़ाकर 800 करने का प्रस्ताव रखा गया है।आपको बता दें कि साल 2010 के बाद कलाकारों के मानदेय नही बढाया गया है।उत्तराखंड का कलाकार दर दर भटकने को मजबूर है।