स्पर्श गंगा को क्यों मिला कल्याण सिंह रावत “मैती” जी का सर्मथन

गंगा समेत सहायक नदियों को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे महत्वपूर्ण कार्यक्रम नमामि गंगे से जुडे़ अभियान स्पर्श गंगा बोर्ड को एक अभियान का रूप दिया गया है। देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम का शुभारम्भ पद्मश्री अनिल जोशी,विश्व विख्यात पर्यावरणविद् कल्याण सिंह रावत “मैती”, डाॅ. आर के जैन समेत कई गणमान्य लोगों ने किया।कार्यक्रम का संयोजन पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सासंद डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा किया गया था।कार्यक्रम के दौरान डाॅ. ज्योति द्विवेदी को स्पर्श गंगा महा अभियान का ब्राड़ एबेसडर चुना गया।

हिमवंत प्रदेश न्युज को दिये एक इंटरव्यू में कल्याण सिंह रावत मैती ने कहा कि स्पर्श गंगा बोर्ड को हटाकर इसे अभियान का रूप दिया गया है।जिसमें समूचे उत्तराखंड के स्कूली बच्चों,समाजसेवीयों और प्रतिष्ठि  व्यक्तियों के द्वारा जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा और गंगा के प्रति स्वच्छता का भाव जगाया जायेगा। ताकि गंगा स्वच्छ व निर्मल रह सके।साथ ही इस अभियान में गंगा को स्वच्छ करने के लिए भागीदारी सुनिश्चित की जानी है इसके लिए जन जागरूकता,सफाई अभियान ट्रेनिंग आदि कार्यक्रम किये जायेगें। केन्द्र सराकार द्वारा उत्तराखंड के लिए अलग बजट का प्राविधान किया जा रहा है। ताकि पहले की भाॅंति गंगा और सहायक नदियों को स्वच्छ व निर्मल बनाया जा सके।साथ ही घर-घर से कूडे का निस्तारण किस प्रकार से किया जायेगा और सामुहिक कार्यो में उपयोग किये जाने वाले प्लास्टिक का प्रयोग न करने और परंम्परागत वस्तुओं (मालू के पत्तों) का प्रयोग करने के लिए भी जागरूता अभियान चलाया जायेगा।

एक सवाल के जवाब में मैती जीं ने कहा ऋषिकेश समेंत गंगा की सहायक नदियों के तटीय क्षेत्रों में सफाई के लिए छोटी-छोटी स्यंमसेवी संस्थाओं को जिम्मेदारियां दी गई है।गंगा में राफ्टिंग व कैम्पिंग कराने वाली संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे कूडें का निस्तारण कहां किया गया है वकायदा विडियों रिकाडिंग कर बतायेगें इसके बावजूद भी अगर गंगा में प्लास्टिक या कूडा दिखाई दिया तो इन्हें दण्डित करने करनें का प्राविधान है। इनकी देख-रेख के लिए स्थानीय ग्राम पंचायतें व स्कूलों को जिम्मेदारी दी जा रही है।

गौरतलब है कि कल्याण सिंह रावत “मैती” ने पर्यावरण को भावनात्मक रूप से जोडा और आज विश्व के कई देशों समेत पूरे देश में इस अभियान को जमकर सराहा जा रहा है। उन्होने ने पर्यावरण  के नाम दिखावा न कर धरातल पर वो काम कर दिखाया जिससे प्रभावित होकर कनाडा की प्रधानमंत्री उनसे मिलने गौचर (चमोली) आयी थी।इतना ही नही उन्होने ने पर्यावरण परिवर्तन के लिए 40 से अधिक अभिनव प्रयोग किये जो पूर्णतः सफल रहें और आज भी नई पीड़ी के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहे है।
-भानु प्रकाश नेगी
देहरादून