सांसद अजय भट्ट के इस बयान की सोशल मीडिया पर हो रही है निंदा।

 

वरिष्ठ पत्रकार वेद विलास उनियाल की फेसबुक वाल से।


देहरादून-एक तरफ़ जहाँ लद्दाक से चुने गए सांसद संसद मे अपने क्षेत्र के हालत समस्या अपेक्षा को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त करते दिखे वहीं उत्तराखंड से चुने भाजपा सांसद अजय भट्ट को शांत झील मे बवंडर मचाने वाला बयान देने की सूझी । अजब यह कि अजय भट्ट राज्य भाजपा के अध्यक्ष भी है । उनके पवित्र क़िस्म के बयान हैं कि उत्तराखंड मे बंगालियो को आरक्षण दिया जाए । यह बयान एक घटिया राजनीति और अपनी लोकसभा सीट और एक दो चेलो के लिए विधानसभा सीट पक्की करने के अलावा कुछ नहीं । आरक्षण उन्हें दिया जाता है जो सामाजिक दौड़ मे कुछ पिछड़ गए हो । उत्तराखंड में बंगाली कुमाऊँ के कुछ गिने चुने क्षेत्रो मे है और कम संख्या मे ज़रूर हैं । लेकिन उनकी स्थिति पहाड़ी लोगों के अनुरूप है ।वे किसी भी तरह ऐसी स्थिति मे नहीं कि ऐसी आवाज़ उठे । वो भी बड़ा लवादा ओढ़े नेता के ज़रिए । जिस उत्तराखंड के सामने इतनी दिक़्क़तें हो। आए दिन आपदा जीवन तहस नहस करती हो। रोज़गार की समस्या हो वहाँ अजय भट्ट के यह बात सबसे ज़रूरी लगी । कैसा हल्की सोच है । एक मुख्यमंत्री थे जो उत्तरकाशी जाते थे तो कहते थे मैं पहाड़ी हूँ और सितारगंज मे बाबू मोशाय बन जाते थे ।

हक़ीक़त यह थी न उन्हें पहाड़ी बोलनी आती थी न बंगाली । एक ये हैं जनता ने मोदी के नाम पर इनकी क़िस्मत रंग दी वरना ज़मानत के लाले पड़ते। मगर बंगालियों के आरक्षण का जुमला फेंकते है । बंगालियो का उत्तराखंड में अपनी तरह का योगदान हैं । ख़ासकर कुमाऊँ बेल्ट मे वह सामाजिक समरसतावादी माहौल बनाए हैं । बंगाल संस्कृति की खनक उत्तराखंड मे दिख जाती है । बंगालियो ने कभी उत्पात भी नहीं मचाया पर हमारे पहाड़ी नेता अपनी राजनीति के लिए उन्हें उकसा रहे है । अजय भट्ट के आगे आकर बताना चाहिए वास्तविकता क्या है ।