18वी सदी का जीपीएस सर्वे ऑफ इंडिया में सुरक्षित

देहरादूनःवर्तमान 4 जी इंटरनेट स्पीड के जमाने मे किसी भी स्थान की सही सही स्थित का पता लगाना बहुत आसान है।लेकिन अगर वत 18वी शताब्दी की करी जाय तो तब यह सब इतना आसान नही था।लेकिन सर्वे ऑफ इंडिया पास उस जमाने में भी मानचित्र के लिए सटीक यंत्र थे जो आज भी सर्वे ऑफ इंडिया के देहरादून संग्राहालय में पास सुरक्षित है।वही आज की तिथी में जीपीएस यानि की ग्लोबल पोजिएशन सिस्टम एक महत्वपूर्ण यंत्र है। जिसका एक संरचना संग्रहालय में मौजूद है.. सर्वेर बताते है सर्वेनिग में सबसे ज्यादा जीपीएस का ही इस्तमाल किया जाता है… जिससे हम किसी भी स्थान की जानकारी को प्राप्त कर सकते है.


सर्वे ऑफ इंडिया के संग्रहालय का। जहां कई दशक पूराने उपकरण मौजूद है।गौरतलग है कि ये वही उपकरण है जिनका देश की मैंपिग में इस्तमाल किया गया था.. सर्वेर ऑफिसर बताते है ये 1800 के समय के उपकरण है। जिनका देश की मैंपिग में महत्वपूर्ण योगदान है.यही नहीं ब्राश के बने ये उपकरण वजन में काफी भारी होते है। सर्वेयर बताते है कि इन यंत्र की सहायता से तारों को पढ़ा जाता था,और यह खगोलीय गणना में भी काफी सहायक सिद्व होते थे।
तो देखा संग्राहलय में मौजूद ये यंत्र देश की मानचित्र में क्या योगदान दे रहे है.. खास बात यह कि इन उपकरण 1800से1900 के दशक से है। जिन्हे यादगार के रूप में संजोग के रखा है। ये यंत्र आज भी सर्वे ऑफ इंडिया की शान बडा रहे है। जिन्हें देखकर लोग अचम्भित रह जाते है।

रवीना कॅुवंर