कोरोना वारियर्स- शिल्पा के जज्बे को सलाम, पेश की अनूठी मिशाल

कोरोना वारियर्स- शिल्पा के जज्बे को सलाम, पेश की अनूठी मिशाल

देहरादून। आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी बताने जा रहे है, जिसके जज़्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। कोरोना की इस लड़ाई में वो भी पूरे जोश और उत्साह के साथ अपना सहयोग दे रही है। पेशे से एक उद्यमी है, जो अपने व्यवसाय को स्थापित करने में लगी है, औरों की तरह वह भी अपने घर मे आराम से रह सकती थी। 3 साल की छोटी बेटी है, सास-ससुर और पति है, इन सबकी जिम्मेदारी भी हैं। वो चाहती तो घर मे ही रहकर अपने घर की जिम्मेदारी निभा सकती थी। लेकिन इन सबसे एक और रास्ता चुना, जो कठिनाई वाला था। उसने कोरोना की इस लड़ाई में अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ करने का निर्णय लिया। उसके इस निर्णय में उसके पूरे परिवार ने सकारात्मक सहयोग दिया और उत्साह बढ़ाया।

कोरोना वारियर्स शिल्पा की अनूठी मुहिम

अब आपको बताते है कि वो कौन है, क्या करती है। उस कोरोना वारियर्स का नाम शिल्पा भट्ट बहुगुणा है, पेशे से उद्यमी है। पिज़्ज़ा इटालिया के नाम से देहरादून शहर में स्टोर है। लॉक डाउन के कारण सभी बन्द है। शिल्पा बताती है कि “जो सफ़र अकेले शुरू किया था, आज उस सफ़र में और लोग जुड़ गए । शुरू किया लेकिन घबराहट थी क्या मैं इस सफ़र को अकेले पूरा कर पाऊँगी, क्यूँकि सच कहूँ तो धीरे-धीरे मेरी जेब भी जवाब देने लगी थी, लेकिन कहते हैं ना “जहाँ चाह वहाँ राह” माता रानी ने अपने बंदो के लिए रास्ता ख़ुद ब ख़ुद बना दिया । ख़ुशी इस बात की हैं कि सबसे पहले मदद का हाथ मेरे अपने कर्मचारियों ने बढ़ाया अपने अपने सामर्थ्य के हिसाब से उन्होंने इस मुहिम में मेरा साथ दिया ।

आज मेरी एक दोस्त जिससे मैं सिर्फ़ एक ही बार मिली हूँ बस मैसिज में कभी कभी बात हुयी उन्होंने आज हमें अपने सामर्थ के हिसाब से राशन दिया । देहरादून के रॉयल एन्फ़ील्ड बाइकर ग्रूप ने आज हमको राशन दिया ताकि हम अपनी ये मुहिम जो 20 दिन से चला रहे हैं ये चलती रहे । कुछ मदद ऐसी भी हैं जिसको लफ़्ज़ों में नहीं बयान किया जा सकता मेरे साथ वो पहले दिन से हैं जब भी ज़रूरत हुयी किसी ना किसी रूप में उन्होंने मदद की । हम लगातार 20 दिन से जरूरतमंद लोगों को भोजन करवा रहे हैं, दिन में 200 से 300 लोगों का खाना बनता हैं और शाम को पुलिस के जवानो के लिए चाय और नाश्ता बनाते हैं । तस्वीरों से नाश्ते की झलक दिख ही रहीं होगी । बस अब यही दुआ हैं की ये करवा जब तक ये समस्या हैं तब तक बिना किसी रुकावट के चलता रहे । उन सभी को दिल से शुक्रिया जिन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया । आज 20 दिन बाद ये नतीजा आया की मैं अब इस मुहिम में अकेले नहीं रहीं मेरे साथ और हाथ जुड़ गए है।

शिल्पा के संघर्ष की कहानी

शिल्पा अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए कहती है कि मेरे माता-पिता चाहते थे, कि मैं उच्च शिक्षा विदेश में पूरी करूं। पिता ने जिद की, चली भी गई, मगर मन नही लगा। परिवार लंदन में ही रहता था। मगर मुझे दिल्ली में ही रहकर ही पढ़ाई पूरी करनी थी। लंदन के एक बड़े कालेज में एडमीशन भी हो गया। मैं गुमशुम सी रहने लगी। सच कहूं तो मेरा मन वहां बिलकुल भी नही लगता था। पिता की लाडली थी, तो पिता को मुझे भांपने में बिलकुल देर नही लगी, और बाबजूद इसके की कालेज की फीस भी जमा हो चुकी थी, उन्होंने मेरे सपनों को उड़ान देने के लिए मुझे वापस दिल्ली भेज दिया। यहां मैने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। मैने कैरियर की शुरूआत एक निजी चैनल में बतौर संवाददाता शुरू की। मगर टीवी की चकाचौंध से जल्दी मन भर गया। इधर परिवार चाहता था, कि मैं शादी कर लूं। मैने उनकी इच्छा का सम्मान किया। इस दौर में मैं एक शिक्षण संस्थान में जर्नललिज्म के बच्चों को पढ़ाने का काम किया करती थी। सब ठीक चल रहा था मगर जब भी मैं किसी बेटी से जुड़ी भेदभाव की खबरें पढ़ती मानों ऐसा लगता किसी ने मुझपर दुखों का पहाड़ गिरा दिया हो। सच बताऊं तो मैं सोचती थी जन्म देने के लिए मां चाहिए, राखी बांधने के लिए बहन चाहिए, लोरी सुनाने के लिए दादी चाहिए, जिद पूरी करने के लिए मौसी चाहिए, खीर खिलाने के लिए मामी चाहिए, साथ निभाने के लिए पत्नी चाहिए, पर ये सभी रिश्ते निभाने के लिए बेटी का होना जरूरी है फिर बेटी और बेटे में भेदभाव क्यों। बस मैने इस क्षेत्र में काम करने की सोची। दूसरी तरफ आर्थिक तौर पर खुद को सश्क्त करने की कोशिश जारी रखी। आज से दो साल पहले मैंने स्वयं का रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। यहां भी एक पिता बेटी के सपनों के पूरा करने के लिए साथ खड़ा रहा। हमने Pizza Italia के सहारे एक शुरूआत की। आज तीन साल के बाद मुझे खुशी है कि आज 7 Restaurants, जिसमे 04 पिज़्ज़ा इटालिया, 2 angreji beat तथा 01 इडली बार है। इन सभी मे आज कुल 88 कर्मचारी काम कर रहे है, जिसमें पहाड़ की वो बेटियां भी है जो पढ़ाई भी करती है औऱ काम भी।

पुलिस जवानों ने की सराहना

शिल्पा रोज शाम को चाय और नाश्ता तैयार करती है और देहरादून शहर में जगह चौराहे पर ड्यूटी दे रहे पुलिस जवानों को देती है। खास बात ये होती है कि हर रोज कुछ नया होता है नाश्ते में, जिसमे पौष्टिकता का पूरा ध्यान रखा जाता है। पुलिस जवानों भी शिल्पा के इस जज़्बे की सराहना करते है।