आरटीई का खुलासा, CBSC में बड़ा गड़बड़झाला

आरटीई का खुलासा

पूर्णिमा

आरटीई के तहत महज 9 प्रतिशत बच्चे ही शिक्षा ग्रहण कर पा रहे हैं। जब्कि एक्ट के मुताबिक 25 प्रतिशत तक बच्चों को निशुल्क शिक्षा मिलनी चाहिए थी। यह खुलासा तब हुआ जब बाल आयोग ने सीबीएसई से संबध स्कूलों की एक बैठक की।

गरीब और निर्धनों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से आरटीई एक्ट बनाया गया।  जिसमें हर प्राईवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत तक के कोटे में गरीब बच्चों को शिक्षा देना था। लेकिन बाल आयोग की मानें तो केवल 9 प्रतिशत तक ही प्राईवेट स्कूल बच्चों को ले रहे हैं। जिससे बेहतर योजना होने के बावजूद बहुत सारे बच्चों को इसके लाभ से वंचित रखा जा रहा है। हालांकि विभाग इस योजना के सफल न होने का कारण फॉर्म का आॅनलाईन होना और उसमें दी गई जानकारियों को जुटा

जहां बाल आयोग का दावा है कि केवल 9 फीसदी तक ही बच्चों को आरटीई के तहत शामिल किया जा रहा है। तो वहीं नेशनल पैरेंट्स एसोशिएशन का मानना है कि आरटीई योजना ही बंद कर देनी चाहिए। क्योंकि इसका लाभ उचित बच्चे को नहीं मिल पा रहा है। एसोसिएशन की मानें तो निजी स्कूल बच्चों को शिक्षा देने को तैयार नहीं हैं। लेकिन दूसरी तरफ दस्तावेज दाखिल करने की समय सीमा कम होने के कारण भी अधिकतर बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

भले ही हमारी सरकारों का उद्देश्य बच्चों का बेहतर भविष्य देना हो। लेकिन बाल आयोग के किए गए खुलासे से यह बात सच साबित होती दिख रही है कि प्रदेश में आरटीई पूरा फायदा नहीं दिलवाया जा रहा है। चाहे वह विभाग की बात हो या फिर निजी स्कूलों की। लेकिन यह बात पक्की है कि इसके कारण जरूरतमंद बच्चों को उनका हक नहीं दिया जा पा रहा है।