सरस मेले में पहाडी खास मिठाई रोट व अरसे! खास पैकिंग में।

पहाड़ों में आज भी अगर शादी आदि शुभ पर्व होते है तो खास मिठाई के तौर पर रोट और अरसा बनाये जाते है और मेहमानों को भेंट के तौर पर दिये जाते है।इतनी तक कि पहले के समय में चैत के माह में ध्याणी(विवाहित स्त्रीयों)को दिये जाने वाला कलउ यानी की चैत के महीने में दी जाने वाली मिठाई रोट और अरसा ही होते थे। लेकिन समय के साथ-साथ कई तरह की मिठाईयों के बाजार में आने से यह प्रचलन कम हो गया।


राज्य स्थापना के बाद पहली बार सरस मेले में पैकिंग में बिकने के लिए आये रोट व अरसे का लोग जमकर मजा ले रहे है और खरीदकर भी ले जा रहे है। भले ही पैकिंग आर्कषक नही है लेकिन रोट और अरसे काफी अच्छे बने हुए है,जिनको देखते ही मन ललचा जाता है और खाये बिना नही रहता है।फूड प्रोसेसिंग में डिप्लामा कर चुके धमेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि जब से हमने यहां पर स्यंम सहायता समूह की सहायता से बने पहाडी उत्पादों का स्टाल लगाया है,और अरसा और रोट की खास पैकेजिंग में बेचना शुरू किया है तब से काफी अच्छी मात्रा में लोग इन्हें खरीद रहे है। क्योंकि लोग गांवों से लगातार पलायन कर रहें है,शहरों में अपने पहाडी पौष्टिक पकवानों को नही भूल पाये है। लोगों की डिमांड पर हम अब शहरों में भी रोट और अरसें पहुंचा रहे है। जिन्हें लोग खुब सराह रहे है। महिला स्वंय सहायता समूह द्वारा बनाये गये रोट व अरसे की रोजना एक कुन्टल तक की खपत है जिससे प्रत्येक माह प्रति महिला को कम से कम पांच हजार रूपये की आय प्राप्त हो रही है। धमेन्द्र का कहना है कि हम ग्रामीण क्षेत्रों में पाये जाने वाले स्थानीय उत्पादों जैसे तिमला(गूलर,)गैठी आदि का अचार बनाकर बेचते है जिससे काफी फायदा महिला समूहों को हो रहा है।


वर्तमान समय जिस तरह की मिलावट व जंक फूट का प्रचलन चल चुका है जिससे आये दिन कई प्राणघातक बीमारियों से हजारों लोगों की असमय मौत हो रही है,जिसका मुख्य कारण पलायन है गांवों में लगातार बंजर होती खेती व सीमित मात्रा में कृर्षि होने के कारण जंगली जानवर खेती को तहस नहस कर देते है जिससे यहां के किसानों का कृषि से मोहभंग हो रहा है।शहर में रह रहे लोग जैविक उत्पादों का भोज्य पदार्थ तो चाहते है लेकिन उन्हें वह आसानी से उपल्बध नही हो पाता है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित देहरादून के परेड ग्राउड में हर साल लगने वाले सरस मेले में यह दालें,अचार,व कुछ खास साग शब्जी तो हर साल मिलती है लेकिन पहाडों में शुभ अवसरों पर बनाये जाने वाले रोट व अरसे पैकिंग में पहली बार यहां बिकने के लिए आये है। जिनका यहां आये लोग जमकर मजा ले रहे है।

-भानु प्रकाश नेगी,