गणतंत्र दिवस पर बाबा रामदेव का ममता बनर्जी को नसीहत

योग गुरु स्वामी रामदेव ने आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता में वापस लौटने के लिए कई नुक्से दिए उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी सत्ता में वापस आना चाहती हैं तो है रामकृष्ण और हिंदू देवी देवताओं को उसी तरह से सम्मान और गौरव दें जिस तरह वह इस्लाम को देती हैं उन्होंने कहा कि आदेश हिंदू मुसलमान सिख इसाई सभी का है और सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है उन्होंने कहा कि हमारे देश में राम और कृष्ण हमारी संस्कृति से जुड़े हैं मेरा नाम रामदेव है और हम राम और कृष्ण के संस्कारों से पुष्पित पल्लवित हुए हैं आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर पतंजलि योग पीठ में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ध्वजारोहण कर रहे थे उन्होंने ध्वजारोहण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आज देश का अन्नदाता किसान गतिरोध के रास्ते पर है और किसान किसी गतिरोध में फंस जाए यह देश के लिए ठीक नहीं है केंद्र सरकार से उन्होंने अपील की कि वह गतिरोध को करने के लिए पहल करें और किसान भी गतिरोध को खत्म करने के लिए अपनी ओर से पहल करें उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ किसानों के हित के लिए पुरुषार्थ करेगा विदेशों में पॉम ऑयल के लिए हमारा करोड़ों रुपए चला जाता है

उसके लिए पतंजलि योगपीठ कार्य करने जा रहा है और जिस से ढाई लाख करोड रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत होगी उन्होंने कहा कि हम दाल और खाद्यान्न तथा चीनी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गए हैं परंतु अभी खाद्य तेलों में हमें आत्मनिर्भर होना है स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति और विरासत को जाने के लिए पतंजलि स्वामी विवेकानंद और शिवाजी और स्वामी दयानंद जी श्रद्धानंद जी के विचारों को आगे बढ़ाएगी और अब स्वास्थ्य क्रांति के बाद पतंजलि योगपीठ सिक्षा के क्षेत्र में क्रांति करने जा रही है और भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन हो गया है जिसके माध्यम से हम मैकाले की शिक्षा पद्धति की जगह भारतीय शिक्षा पद्धति को प्रतिपादित करेंगे और साथ-साथ संस्कृत पढ़ाने के अलावा विदेशी भाषाओं का भी छात्रों को दिन क्या कराया जाएगा साथ ही आधुनिक विषय भी पढ़ाए जाएंगे और लाखों विद्यालय भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़े जाएंगे इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ द्वारा संचालित आचार्यकुलम के छात्र छात्राओं ने आकर्षक और हृदयस्पर्शी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने भी अपने विचार रखें