रत्नेश्वर महादेव जहां पहाड़ों पर रत्न की तरह चमकता है शिवलिंग

रूद्रप्रयाग: रत्नेश्वर महादेव की लीला अपार है। जनपद चमोली के कर्णप्रयाग बिकास खण्ड के अन्तर्गत ग्राम रतूड़ा में स्थित हैं रत्नेश्वर महादेव। बताते हैं कि प्राचीन काल में गांव के एक वृद्ध ब्यक्ति को सपने में भगवान शिव ने आकर दर्शन दिए और कहा कि गांव से ऊपर एक खड़ी कठोर चट्टान के समीप मेरा प्रिय स्थान है वहां पर मेरा मन्दिर सथापित कर पूजा करने से सारे दु:ख -दर्द दूर हो जायेंगे।

वृद्ध ब्यक्ति ने कहा कि प्रभु वहां पर तो बड़ी भीमकाय चट्टान है किस स्थान पर आप बिराजमान है सही स्थिति बता दीजिये। तब भगवान शिव ने बताया कि चट्टान पर मेरा प्रिय ऊं अक्षर अंकित है उस स्थान से ग्यारह हाथ की दूरी पर खुदाई करने पर मैं लिंग रूप में दिखाई दूंगा। जब सुबह वह वृद्ध ब्यक्ति उस स्थान पर गया तो उसे चट्टान के एक भाग में ऊं अक्षर अंकित मिला। तदनुसार उसने निर्दिष्ट स्थान पर खोदा तो सुन्दर सा छोटा सा लिंग मिल गया। फिर सारे गांव के लोगों ने मिल कर सुन्दर मंदिर की स्थापना की। पीपल और बेलपत्र के पेड़ रोपे। सच्चे मन से पूजा करने पर मनवांछित फल प्राप्त होता है। कभी कभी यहाँ भगवान शिव रत्न की तरह अपनी आलौकिक माया भी दिखा देते हैं।

कभी कभी कोई पत्थर रत्न की तरह कुछ क्षणों के लिए चमक जैसी माया दिखा देता है, जो तुरन्त गायब हो जाता है। इसी लिए यहाँ पर भगवान शिव रत्नेश्वर के रूप में बिराजमान है। स्थानीय लोगों द्वारा अब प्रतीक्षालय, धर्मशाला का निर्माण किया गया है।बांज के खूबसूरत जंगल से घिरा यह स्थान अति मनोरम और शांत हैं। शिवरात्रि को यहाँ भक्तों की भारी भीड़ रहती है। यहां पहुचने के लिए कर्णप्रयाग से लगातार टैक्सी सेवा उपलब्ध रहती है। लगभग 14कि मी की यात्रा टैक्सी से करके रतूड़ा पहुंच जाते हैं। रतूड़ा स्टेशन से लगभग सौ मीटर का रस्ता पैदल चल कर मंदिर पहुंचा जा सकता है। जय रत्नेश्वर महादेव। जय महा देवाधिदेव। सबकी मनोकामना पूर्ण करे।

विख्यात पर्यावरण प्रेमी कल्याण सिंह रावत “मैती” की Fb वाल से।