दून की सड़कों पर जानलेवा खड्डे शासन-प्रशासन मौन?

बाबू जी जरा धीरे चलाना बचना संभल के बडे धोखे है यहां वोट राह में

-अस्थाई राजधानी समेत प्रदेश की सड़कों की हॉलत खराब।
-जिम्मेदार सफेद पोसों ने खराब सड़क के लिए बारिस को ठहराया जिम्मेदार।
-हादसे का इंन्ताजार में देहरादून आईएसबीटी की सड़कें।

भानु प्रकाश नेगी

हमारे देश में सड़कों के हाल किस कदर खराब है यह किसी से छुपी नही है, कही-कही तो सड़कों के हालत इतने खराब है कि समझ में नही आता कि सड़क में गड्डे है या गड्डों में सड़क। इन सड़क को देखकर इस पर चलने वाले वाहन चालकों के लिए दसको पहले धूम मचाने वाला सदाबहार गीत ……..“बाबू धीरे चलना जरा संभल के बडे धोखे है इस राह मे“ं याद आता है।
प्रदेश में सडकों के हालत खराब है पिछले दिनों नैनीडांडा बस हदसा इन्हीं खड्डों की बजह से हुआ था। जिसमें 50 से अधिक लोगों की जानें चली गई थी। अस्थाई राजधानी देहरादून के सड़कों की हालत भी आजकल कुछ ज्यादा ही खराब हो गई है जिससे यहां लगातार वाहन चालक चोटिल हो रहे है।
देहरादून शहर के मुख्य मार्ग आईएसबीटी, हरिद्वार बाई पास पर फाईओवर का कार्य निर्माणाधीन है। पिछले एक साल से अधिक समय से यहां यह कार्य चल रहा है। लेकिन आजकल बरसात के मौसम में सड़क पर इतने बडे-बडे गड्डे हो गये है कि, आये दिन यहां कोई न कोई वाहन चालक चोटिल हो जाता है और चौराह पर ही इतना बडा गडडा हो गया है कई बार बडे वाहन गिरते-गिरते बचे है,लेकिन शासन- प्रशासन जानबूझ कर मौन बना हुआ है।


प्रदेश की लाईफ लाईन कहे जाने वाली सड़कें अभी तक की सरकारों की प्राथमिकता मैं ही नही रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्थाई राजधानी की सड़कों के हालत इस तरह से खराब है जहां हर दिन शासन और प्रशासन इन सडकों से कई बार गुजरतें है,तो पहाड़ी जनपदों की सड़कों के क्या हॉल होगें सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। मौन शासन प्रशासन के लिए यही कहा जा सकता है कि………. “बाबू जी जरा सोच के वोट देना, बडे धोखे है यहां जनता की राह मै“।