“खैरासैंण का सूरज” को ऐसा क्या कहा ‘पद्मश्री बसंती बिष्ट’ ने कि C M साहब गंम्भीर हो गये।

मेरे अंधियारे गांव को रोशन कर दे
खैरासैंण का सूरज: बसंती बिष्ट

– सीएम पर लिखी किताब के अवसर पर पदश्री बसंती बिष्ट ने की अपील।

मैं जैसी हूं, वैसी ही रहना चाहती हूं। मैं गाय पालती हूं, घास लेने जाती हूं। अकेले में गाती हूं। मैं चाह कर भी आप जैसे (नेता) नहीं बन सकती। सीएम साहब पहले डिफेंस कालोनी में रहते थे। आप निर्मल व संवेदनशील है, यह अच्छी बात है कि सत्ता के बावजूद आपमें बदलाव नहीं आया। लेकिन मैं अपने पहाड़ को लेकर, अपने गांव की स्थिति को लेकर चिन्तित हूं।
यह कहना था पदश्री जागर गायिका बसंती बिष्ट का। मौका था देहरादून के एक होटल में आयोजित सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर उत्तराखंड के प्रख्यात चिकित्सक डा. नंदन सिंह बिष्ट द्वारा लिखी गई किताब खैरासैंण का सूरज के लोकार्पण का।

पदश्री बिष्ट ने बहुत ही भावुक व संवेदनशील मुद्दा सीएम के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि मेरा गांव सीमांत है। अभी गांव गई थी तो पता चला कि घेस जो मेरा गांव है, वहां की एक गर्भवती महिला को पुरुष खाट पर लिटाकर मीलों पैदल चल कर अस्पताल ले गये, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पहाड़ में चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है।

पलायन हो रहा है। गांव में अब लोग नहीं हैं। पहले हमें केवल चीनी और नमक की जरूरत महसूस होती थी बाकी सब गांव में हो जाता था। लोग मौन पालन और दुग्ध उत्पाद पैदा करते थे। खेती करते थे, एक रोटी घी और शहद से भरकर खा लो तो पेट भर जाता था। लेकिन अब गांवों में सन्नाटा पसरा है। वह सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से भावुक अपील करती हैं कि पहाड़ों को दोबारा से आबाद कर दो। मौके कई लोगों को मिलते हैं लेकिन इतिहास कोई कोई ही बनाता है। सुन रहे हो खैरासैंण के सूरज, पहाड़ के गांवों में भी अपनी कुछ रोशनी बिखेरो तो माने।