अब यादों में रह गया देहरादून का प्रभात सिनेमाघर

 

 

 

 

 

 


-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून


जिस देहरादून शहर में कभी सिनेमाघर यहां की शान हुआ करती थे वह अब धीरे धीरे बंद होते जा रहे है।पहले कनक सिनेमा हॉल,फिर कृष्णा पैलेस,और अब देहरादून का सबसे बेहतरीन सिनेमा हॉल प्रभात बंद कर दिया गया है। इन सिनेमा हॉलो के बंद होने के पीछे का क्या कारण है।देखते है एक रिपोर्ट

-तेजी से बदलते डिजीटल की दुनियों में हर वो चीज इतनी जल्दी से बदल रही है।कभी देहरादून की शान में चार चॉंद लगाने वाले सिनेमाघर अब लगातार बंद होते जा रहे है।इन सिनेमाहॉलो की फेहरिस्त में अब देहरादून का गड्डे वाला सिनेमा हॉल के नाम से प्रसिद्व प्रभात सिनेमाहाॅल  बंद हो गया है। इस सिनमाहॉल के चेयरमैन दीपक नागलिया का कहना है कि मल्टी पलक्स के दौर ने सिंगल सिनेमा हॉलों को बंद होने के लिए मजबूर कर दिया है।69 साल से इस सिनेमाहॉल की जिम्मेदारी संभाल रहा हूंॅ मेरे दर्द और पीड़ा को खुद संमझा जा सकता है।

दीपक नागलिया,चेयरमैन प्रभात सिनेमा

प्रभात सिनेमा शहर के उन गिने चुने सिनेमाहॉलों में से एक था जिनमें कभी फिल्म काटी नहीं जाती थी। शहर के बाहर के लोग भी यहां पिक्चर देखने के लिए आते रहे थे।प्रभात सिनेमा में अपने जीवन के 40 से अधिक बसंत गुजराने वाले सीनियर ऑपरेटर दिनेश चन्द्र काला का कहना है कि इस सिनमा हॉल की खास बात यह थी कि यहां पर कभी भी फिल्म काट कर नहीं दिखाई जाती थी,क्रांति ,आशा समेत दर्जनों फिल्में यहां हाउस फूल रही है।
-दिनेश चन्द्र काला,सिनियर ऑपरेटर

– प्रभात सिनेमा हॉल में हिन्दी समेंत उत्तराखंडी बोली भाषा की भी कई फिल्में दिखाई गई जिसमें साल 2016 में भुली ए भुली फिल्म के कई सो दिखाये गये।प्रभात सिनेमा हॉल के बाद होने से एक कलाकारों में भी काफी निरासा है। प्रसिद्व अभिनेता बलदेव राणा का कहना है कि वेसे ही यहां के सिनेमा हॉल एक के एक बंद हो रहे है यह फिल्म इंण्डस्ट्रीज का नुकसान है प्रभात सिनेमा हॉल एक ऐतिहासिक सिनेमा हॉल है जिसका बंद होना दुखद घटना है।
-बलदेव राणा प्रसिद्व अभिनेता

.प्रभात सिनेमा के बंद होने से यहां पर काम कर रहे लगभग 20 लोगों पर अब रोजी रोटी का संकट आ गया है। एक तरफ वह सिनेमा हॉल के बंद होने पर दुखी है वही रोजगार समाप्त होने से उनकी परेसानियों बड़ गई। अपने जीवन के अनमोल 40 साल इस सिनेमा हॉल को देने वाले कंटीन संचालक निहाल सिंह चौहान का कहना है कि यह सिनेमा हॉल कभी इतना फेमस था कि यहां पर साल में सिर्फ साल में तीन फिल्में लग पाती थी,कई फिल्में ने यहां गोल्डन व सिल्बर जुबली तक मनाई है।इसे बंद होने से हमारे रोजगार पर भी संकट आ गया है।

-निहाल सिंह चौहान,कंटीन संचालक

शहर के माने जाने सिनेमा हॉल प्रभात के बंद होने से दर्शक भी काफी मायूस है। बचपन से ही इस सिनेमा हॉल में पिक्टर देख रहे बुर्जग अमर सिंह धुन्ता का कहना प्रभात सिनेमा के बंद होने का हमें काफी दुख है 1947 से इस सिनेमा हॉल में हम पिक्चर देखने जाते रहे है।प्रेम पुजारी फिल्म को हमने इसी हॉल में देखा था।

अमर सिंह धुन्ता, दर्शक
मल्टीप्लक्स के आधुनिक दौर ने सिंगल सिनेमाहॉलों को उनकी माली हॉलत के चलते बंद होने पर मजबूर कर दिया है। अब शहर के सिंगल सिनेमाहॉल अपनी अंतिम सॉसे गिन रहे है।भले ही देहरादून का नामचीन सिनेमाघर प्रभात अब बंद हो चुका हो लेकिन शहर और शहर के बाहर जिन लोगों ने इस पिक्चर हॉल में प्रसिद्व फिल्में देखी उनके दिलों दिमाग में इसकी यादें हमेंसा छाई रहेगी