पेयजल के लिये 975 करोड़ की धनराशि स्वीकृत।

 

देहरादूनः  वित्त मंत्री  प्रकाश पन्त ने दिल्ली से दूरभाष पर अवगत कराया है कि विश्व बैंक पोषित प्रस्तावित अर्द्धनगरीय क्षेत्रों हेतु भारत सरकार, राज्य सरकार एवं विश्व बैंक के मध्य आज दिनांक 22.01.2018 को वित्त मंत्रालय दिल्ली में वैद्यानिक अनुबन्ध हुआ है। उत्तराखण्ड शासन की ओर से उत्तराखण्ड में 2018 से 2023 तक (06 वर्ष) चलने वाले उक्त पेयजल कार्यक्रम से सम्बन्धित अनुबन्ध पर सचिव पेयजल  अरविन्द सिंह ह्यांकी द्वारा उक्त अनुबन्ध में हस्ताक्षर किये गये। राज्य सरकार द्वारा विश्व बैंक से वित्त पोषण का प्रस्ताव प्रेषित किया गया था, जिस पर माह नवम्बर, 2017 में छमहवजपंजपवद हुआ था। वर्तमान अनुबन्ध के अनुसार विश्व बैंक से रू0 975 करोड़ के प्रस्ताव पर वित्त पोषण की सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जिसमें विश्व बैंक का अंश रू0 780 करोड़ तथा राज्य सरकार का अंश रू0 195 करोड़ प्रस्तावित है।

जनपद देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर एवं अल्मोड़ा के 35 अर्द्ध नगरीय क्षेत्रों को इसमें सम्मिलित किया जायेगा। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर उक्त 07 जनपदों के ऐसे नगरीय क्षेत्रों को विश्व बैंक द्वारा दिनांक 01.04.2016 की स्थिति के अनुसार चिन्हित किया गया था तथा इस पर लगभग एक वर्ष से चर्चा चल रही थी। मा0 मंत्री जी ने यह भी अवगत कराया कि परियोजना के पूर्ण होने के उपरान्त उक्त अर्द्ध नगरीय क्षेत्रों में भी नगरीय क्षेत्रों की तरह पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी तथा काफी हद तक पेयजल समस्या का समाधान करने में सफलता प्राप्त होगी। उत्तराखण्ड ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता परियोजना के अन्तर्गत चलाये जाने वाले इस कार्यक्रम के निम्नलिखित लक्ष्य भी तय की गई हैंः-

1- लाभान्वित किये जाने वाले अर्द्ध नगरीय क्षेत्रों की संख्या 07 होगी

2- लाभान्वित की जाने वाली जनसंख्या 516222 होगी।

3- मीटरयुक्त निजी जल संयोजनों की संख्या 103244 होगी

4- पेयजल एवं स्वच्छता मास्टर प्लान तैयान किये जाने क्षेत्रों की संख्या-03

5- पेयजल आपूर्ति की वर्तमान दर 50-70 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से बढ़ाकर 100-135  लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की जायेगी।

उत्तराखण्ड राज्य के लिये यह सुखद यह है कि उक्त परियोजना हेतु राज्य सरकार को मिलने वाले ऋण की वापसी भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा 90ः10 के आधार पर की जायेगी। राज्य सरकार को मात्र 10 प्रतिशत धनराशि ही लौटानी होगी।