नौनिहालों की जिन्दगी में जहर घोलता प्लास्टिक….. हेमवंत प्रदेश न्यूज़ डॉट कॉम

सूचना तकनीकी के इस आधुनिक युग में हमारे रोजमर्रा की जिन्दगी को कब और किस तरह से बदल दिया इसका हमें कभी पता ही नही चला। आजकल हमारे रोजमर्रा की जिन्दगी में प्लास्टिक से बनी चीजें इस कदर सामिल और गयी है कि,हम चाह कर भी इसे अपने से दूर नही नही कर पा रहे है,जिसका गहरा प्रभाव हमारे जीवन पर साधे तौर पर दिखाई दे रहा है। पर्यावरण पर प्लाष्टिक से बनी वस्तुओं का दुस्प्रभाव को हम तमाम प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के रूप में समय-समय पर देखने को मिल रहा है। अब हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे है कि हम अपने नौनिहालों को प्लास्टिक से बने बर्तनों में गर्म खाना डाल कर परोस रहे हैं। जबकि डाॅक्टरों के अनुसार प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना डालने से वह कई प्रकार के कैमिकल्स से युक्त हो जाता है, और यह हमारे शरीर में पहुचनें से कम कई प्रकार के विकार पैदा कर जाता है जो गम्भीर रोगों के कारक बन जाता है।जिनमें सुनने की शक्ति का कम होना,स्मरण सक्ति का कम होना और प्रजनन शक्ति का प्रभावित होना प्रमुख है।


पिछले दिनों एक निजि स्कूल में लंच टाईम में जाने का मौका मिला,चूंकि मै मौके पर था तो आंखो देखी से चैंक गया लगभग 95 प्रतिसत से ज्यादा बच्चे प्लास्टिक के टिफिन में से खाना खा रहे थे। ये खाना जब 3 या 4 घण्टे पहले बनाया गया होगा तो निश्चित रूप से गरम रहा होगा और यानी कि इस खाने में भी हानिकारक कैमिकल्स मिले हो सकते है। प्लास्टिक से बने इन बर्तनों से रोजना हमारे बच्चों के शरीर में न जाने कितने कैमिकल्स जा रहे होगे उसका अंदाजा हम शाररिक जांच के बाद ही पता लगा सकतें है।
यह नजारा सिर्फ इस निजि स्कूल का ही नही, बल्कि देश के लाखों स्कूलोेें का भी यही हाल है जो न सिर्फ बच्चों की सेहत विगाड़ सकता है,बल्कि देश के भविष्य माने जाने वाले नौनिहालों को गंभीर रोगों का शिकार बना सकता है, जिससे देश का भविश्य खतरे में पड़ सकता है।


सूचना तकनीकी की सरपट दौड़ती भागती जिन्दगी में हम अपनी सेहत का ख्याल रखने में लगतार फिस्ड्डी होते जा रहे, हम अपनी से सेहत के साथ साथ अपने बच्चों की सेहत पर भी खास ध्यान नही दे पा रहे है। पैसे कमाने की अंन्धी दौड़ में अनियमित दिनचर्या के चलते हम अपनी सेहत के साथ लगातार खिड़वाड करते जा रहें है,जिससे हम अपने पूरे परिवार को गम्भीर रोगों की ओर धकेल रहें है। एक ओर शहरों में आवादी के बड़ते प्रेसर से यहां की जल और वायु लगातार प्रदूसित होती जा रही है,उसके साथ साथ प्लासटिक हमारी राजमर्रा की जिन्दगी का अहम हिस्सा होने के कारण हमें अपने नौनिहालों के साथ गम्भीर रोगों की ओर लेकर जा रहा है।समय रहते हमें अपनी सेहत का ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है, जिसमे बच्चों की पढाई में पर्यावरणीय शिक्षा के साथ साथ खान पान में हमें क्या खाना है और क्या नही खाना यह भी पाठ्क्रम में सामिल होना नितांत आवश्यक है।

प्लास्टिक के वर्तन टिफिन,बोतलें आदि जिनमें हम खाना और पानी पीते है उनको गर्म करने से इनमें रखा खाना हानिकारक कैमिकल में परिर्वतित हो जाता है। हानिकारक कैमिकल 6 या 7 तरह के होतें है जैस विस्फिनाॅल ए जोकि ठच्ै। विस्फिलाॅल नाम से पाॅलीएथीन च्ठब् या पाॅलीसटयरीन आदि है ये सारे खाने पीने के कन्टेनर के रूप में उपयोग मे लाये जाते हेै। जब इन्हें गर्म किया जाता है तो यह हानिकारक कैमिकल में परिवर्तित हो जाते है। जब हम इसे उपयोग में लातें है तो यह हमारे शरीर के हामोन्स सिस्टम को अव्यवस्थित करता है। ये भी वही काम करता है जो हमारे शरीर में इन्डोग्रेन्स सिस्टम करता है। जिसमें यह शरीर की ग्रोथ,हामोन्स लेबल,दिमाग का विकास,प्रजनन से क्षमता का हा्रस,लीबर गुर्दे संे संम्बधित बीमारियां इन सभी में बदलाव ला देता है।बच्चों में विशेष कर दिमागी बुखार आना, दिमागी विकास की क्षमता का विकास रूक जाना,सामान्य अंगों की वृद्वि में असामान्य वृद्वि होना आदि कई प्रकार के गंम्भीर रोग हो जाते है। इसलिए प्लास्टिक के वर्तनो में खाना नही खाना चाहिए।
 डाॅ.प्रताप सिंह रावत,बरिष्ठ बाल रोग विषेशज्ञ,राजकीय दून मेडिकल अस्पताल देहरादून

-प्लास्टिक हमारे पर्यावरण का दुस्मन के साथ साथ यह लगातार हमारी सेहत को भी विगाड़ रहा है। जिसका सीधा असर हमारे बच्चों के शाररिक और मानसिक विकास पर हो रहा है,प्लास्टिक को नष्ट होनें में 100 साल का समय और थर्माकाल को नष्ट होने में 200 साल से अधिक का समय लगता है इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्लास्टिक और थर्माकाल का हमारी सेहत और पर्यावरण में कितना बुरा प्रभाव पड़ता होगा। पर्यावरणीय शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को प्रकृति के साथ उसी के अनुरूप रहने की आवश्यकता है इसी में सम्पूर्ण विश्व का भलाई है।
-कल्याण सिंह रावत “मैती“ पर्यावरणप्रेमी

स्कूली बच्चों के साथ साथ आम लोगों को भी प्लास्टिक से बने वर्तनों मे गरम ं भोजन करने से बचना अतियन्त आवश्यक है यह हमारे शरीर को धीरे- धीरे गंम्भीर मानसिक और शाररिक रूप से बीमार कर रहा है। जहां तक सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल की बात है तो यहां हम बच्चों को समय समय पर प्लास्टिक के वर्तनो में खाने से होने वाली बीमारियों के बारे में बताते रहतें है। और नये शिक्षा सत्र से इस स्कूल में प्लास्टिक फ्री जोन घोषित किया जायेगा जिसमंे सभी बच्चे और स्टाफ प्लास्टिक के टिफिन और पानी की बोतल का उपयोग नही कर पायेगें।
अल्का राणा, उप प्रधानाचार्या सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल।

प्लास्टिक से वर्तनों में खाने से हमारे नौनिहाल और हम लगातार अपनी सेहत खोते जा रहे है,जिसका धीरे धीरे असर हमारी काम करने की शक्ति पर पड़ रहा है। आजकल के समय मे तमाम प्रकार के खाद्य पदार्थ प्लास्टिक से बनी पैकिंग में आ रही है। जिसका सीधा असर हमारी सेहत पर हो रहा है, हम आधुनिकता और विलासिता की दौड़ में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे है। यहां तक कि शादी या अन्य तरह के समारोह में भी प्लास्टिक के बने दोनों पत्तलों में गर्म खाना परोसा जा रहा है हमारी सेहत को बिगाड़ रहा है।साथ ही प्लासटिक हमारे पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है जो बेहद चिन्ता का विषय है।
-डाॅ.के.एस.पंवार,औद्योगिक सलाहकार उत्तराखंड सरकार (चेयरमैन, पाॅलीगाॅन एवं सोशल GROUP)

 

– भानु प्रकाश नेगी की कलम से…….. 

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