कौन है डॉ शरद सिंह नेगी ?क्यों बनाया गया इन्हे पलायन आयोग का उपाध्यक्ष?

सौम्य व्यवहार एवं मृदु भाषी और कुसल नेत्रृत्व के लिए जाने जाने वाले हिमाचल कैंडर के आईएफएस आॅफिसर डाॅ. शरद सिंह नेगी ने भारतीय वन सेवा में 1980 में अपने कैरियर की शुरवात की। देहरादून स्थित वानकी अनुसंधान संस्थान मंे सात साल डायेक्टर पद पर रहे डाॅ नेगी को भारतीय वन सेवा के सर्वोच्च पद महानिदेशक वन एवं विशेष सचिव के पद पर दो साल सेवा देना का गौरव हासिल है। हाॅल ही में सेवानिवृत हुये डा.ॅशरद सिहं नेगी मूल रूप से टिहरी जनपद के रहने वाले है। अपनी माटी और थाती से विशेष लगाव रखने वाले डाॅ.नेगी सदैव उत्तराखंड के विकास के लिए समर्पित रहते है। केन्द्र सरकार और पहाड़ी राज्य हिमाचल के लम्बे अनुभव को देखते हुए वर्तमान उत्तराखंड की त्रिवेन्द्र रावत सरकार ने उन्हें ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। जिससे पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड के गांवों से हो रहे पलायन को रोक लगने की उम्मीद जगी है। पहाड़ी जिलों से पलायन होने से न र्सिफ प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में दबाव बड रहा है बल्कि हमारी परम्पपरागत रीति रिवाज,भेष भूषा,खान पान व सांस्कृतिक विरासतों का भी पलायन हो रहा है। जिससे हमारी परम्परागत सांस्कृतिक विरासतों पर संकट के बादल मंडराने का खतरा पैदा हो गया है। साथ ही प्रदेश के कई सीमांत जिलों से जन शुन्य होने से सामरिक दृष्टि से भी देश को खतरा बढता जा रहा है जो वेहद गंभीर चिंन्तनीय विषय है।

जो लोग कृषि पर निर्भर है उनकी आय बढाने की आवश्यकता है। जैसे कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की कृषि की प्रति व्यक्ति आय की तुलना की जाय तो हिमाचल प्रदेश में 8 हजार से अधिक प्रतिमाह प्रति व्यक्ति आय है। जबकि उत्तराखंड में घटकर चार हजार से अधिक आ रहा है। जाहिर सी बात है कि कही न कही समस्या तो है। क्योकि चार हजार रूप्ये में परिवार के सदस्यों का भरण पोषण नही होता लिहाजा परिवार के एक या दो व्यक्ति को रोजगार की तलास में अन्य जगह पर जाना पड रहा है। अभी तो मै इस तरह का डाटा जुटाने में लगा हूंॅ। उसके बाद ही समस्या के समाधान या विलज पैस्फिक सल्यूसन निकलेगा। ये कहना की यह हो जायेगा तो पूरे उत्तराखं ड में विलज सोल्यूसन हो जायेगा मै नही मानता उसको । क्योकि मुझे लम्बा अनुभव हिमाचल का है वहा पर हर गांव की आर्थिकी में फर्क है। कोई आलू लगा रहा है कोई मटर,कोई सेब, कोई नाशपती, जहां पर प्रकृति ने साधन दिये है सरकार के सपोट से लोग कर रहे है। ये तो विलेज पेस्फिक सोल्यूसन निकालने पढेगें। नही तो यह किताबी सुझाव होंगे जिसका कोई मतलब नही है-डॉ शरद सिंह नेगी