अब प्लास्टिक से जंग जानिए कैसे?

भानु प्रकाश नेगी


-पांच सौ खरब प्रतिवर्ष प्लास्टिक बैग का उपयोंग पूरा विश्व में
– पॉलीबैग और प्लास्टिक वर्तनों में गर्म खाना खाने से होता है कैन्सर जैसे खतरनाक रोग
-पर्यावरण की दृष्टि से सबसे खतनाक है पॉलीबैग
-एक हजार साल में नष्ट होता है,पॉलीबैग

देहरादून- पिछले दिनों प्लास्टिक बैग पर हाईकोर्ट ने सख्त प्रतिबंध लगाने के साथ साथ प्रति प्लास्टिक बैग पांच सौ रूपये जुर्माना लगाने का निर्देश राज्य सरकारों को जारी किया था। इस सख्ताई के बाद नगर निगम ने बाजार में पॉलीथीन को रोकने के लिए कई स्थानों पर छापे मारी कर जुर्माना भी लगाया।इसका असर अभी भी खास तौर पर नहीं दिखाई दे रहा है।हॉलाकि नगर निगम ने एक खुली बैठक की और आम आदमी से लेकर व्यापारियों तक पॉलीबैग को रोकने के सुझाव लिए है। जिसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आये है।अब देखना यह है कि इन सुझावों को नगर निगम और सरकार किस प्रकार से धरातल पर उतार पाती है।
एक सर्वे के अनुसार पूरे विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 500 खरब प्लास्टिक बैंग का प्रयोग किया जाता है।यानी कि प्रति मिनट एक अरब पॉलीथीन का प्रयोग।पॉलीथीन का प्रयोग करने वाले देशों में भारत अग्रणी देशों में से एक है।प्लास्टिक बैग विक्रेताओं और उपभोक्तओं के बीच लोकप्रिय है। क्योंकि यह सस्ती और मजबूत है।बात अगर समूचे उत्तराखंड की करी जाय तो यहां भी प्लास्टिक बैगों का उपयोग जमकर खुल्ले आम होता आ रहा है।समय-समय पर सरकार व नगर निगम आदि इस पर प्रतिबंध की बातें तो करते है। लेकिन जन सहयोग व मजबूत इच्छा शक्ति न हाने के कारण यह मुहिम धरातल पर नहीं उतर पाती है।


प्लास्टिक बैग से जीव जगत के अस्थित्व को बड़ा खतरा
एक सर्वे के अनुसार दूनधाटी में कूड़े और कचरे के 175 मीटरी टन कूडे के निस्तारण के लिए नगर निगम के पास कोई योजना नहीं है।जबकि यहां प्रति दिन 425 मीटरिक टन कूडा निकलता है।इसका सबसे प्रमुख कारण कूडा निस्तारण के लिए ठोस व सक्त योजना का न होना है।यह एक बहुत बड़ी चिन्ता का विषय है।कूडा निस्तारण में सबसे बडे अवरोध के तौर पर प्लास्टिक बैग आते है।जिसके कारण जैविक कूड़ा कई दिनों तक पॉलीथीन में बंद रहता है और वह मिट्टी के साथ नहीं मिल पाता है। नतीजतन उसके सड़न से पर्यावरण में खतरनाक जहरीले जीवाणु पैदा हो जाते है। जो जीव जगत के हर प्राणी खास कर मुनष्य में महामारी का कारक होते है।
प्लास्टिक बैग के कारण पानी के स्रोतों में जल प्रदूषण खतरनाक तरीके से फैल रहा है।जिसके कारण अनेकों प्रकार की जल जनित बीमारियों जिनमें पीलिया,टाईफाईड,पेचिंस, डायरिया व पेट की बीमारियां फैल रही है।जिसके कारण सैकड़ों लोगों को अपनी जान असमय गवानी पडती है।
प्लास्टिक बैग पर हाईकोर्ट सक्त
प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध को लेकर कुछ समय पहले हाईकार्ट के सख्त निदेशों के बाद भी इसका उपयोग जमकर किया जा रहा है। बात अगर देहरादून शहर की करें तो यहां पर इसका कम असर देखने को मिल रहा है। लेकिन अभी भी आम आदमी से लेकर फल सब्जी,व तमाम बस्तुओं को बेचने वाले बिक्रेता प्लास्टिक बैग का प्रयोग नहीं कतराते है।
गर्म खाना प्लास्टिक के बैंग में डालने से होते है जानलेवा रोग
प्लास्टिक के बैग में गर्म खाने पीने की चीजें डालकर खाना आजकल आम बात हो गई है।बल्कि कई रेस्तराओं और घरों में भी प्लास्टिक से बनी प्लेटों में खाना खाना अब नई बात नहीं रह गई है।जबकि विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार प्लास्टिक की थैलियां व वर्तनों के सम्पर्क गर्म खाना आने से उसमें कई प्रकार के खतरनाक रसायन उत्पन्न हो जाते है।ये खरतनाक रसायन खाने के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते है,और कैन्सर,दिल के रोग,डायबीटिज,जैसी प्राणधातक बीमारियों को जन्म देते है।
जीव जन्तुओं के लिए खतरनाक है,प्लास्टिक बैग
प्लास्टिक बैग प्राकृतिक तौर पर विघटित नहीं होते है।यह नॉन बायोडिग्रेबल है इसे विघटित होने में लगभग एक हजार साल तक का समय लग जाते है। आम तौर पर लोग प्लास्टिक बैग में खाना रखकर उसे कही भी फेंक देते है।जिसे खाकर गायों के मरने की खबरें आये दिन आती रहती है।एक अनुमान के अनुसार लगभग 10 हजार समुद्री जीव इन्हें खाना समझकर खा जाते हैं जो उनकी आतों में फंस जाता है और नतीजतन उनकी मौत हो जाती है। इन जीवों में डॉलफिन,कुछवे,वेल्स,पेंग्विन आदि प्रमुख है।
जन जगरूकता व सहभागिता के बिना संभव नहीं प्लास्टिक बैग हटाना
प्लास्टिक बैग विश्व के देशों लिए एक खतरनाक समस्या बनी हुई है। इसके निस्तारण के लिए कई देशों ने रिसाईकिलंग प्लांट के साथ साथ कम से कम उपयोग की भी मुहिम शुरू कर दी है। जिसके परिणाम भी सामने आये है। लेकिन हमारे देश में अभी तक कूड़ा निस्तारण और प्लास्टिक बैगों पर पूर्ण प्रतिबंध का मैनेजमैंट सही तरीके से नहीं हो पाया है। समय समय पर सरकारें व जिम्मेंदार संस्थायें प्रयास तो करती हैं लेकिन यह धरातल पर नहीं उतर पाती है।इसका प्रमुख कारण यह होता है,इस कार्य में आम जनता का सहयोग नहीं मिल पाता है। जिससे सरकार की यह मुहिम परवान नहीं चढ़ पाती है।हॉलांकि इस बार हाईकोर्ट की सख्ती का असर थोडा दिखने लगा है, प्लास्टिक बैग का खुलेआम प्रयोग नहीं हो पा रहा है।लेकिन इसके दूरगामी परिणाम तभी होगें जब आम जनता अपने आने वाले भविष्य को लेकर जागरूक होगी और प्लास्टिक बैग की जगह कपडे के थैलों का उपयोग कर पर्यावरण की शुद्वता में अपना सहयोग देगी।
प्लास्टिक बैग ही क्यों अन्य खाने पीने के पॉली पैक पर प्रतिबंध क्यों नहीं?
अक्सर सामान बेचने और खरीदने के लिए ही उपयोग की जाने वाली प्लास्टिक बैग पर ही प्रतिबंध की बात की जाती है।जबकि आम खाने पीने की बस्तुयें भी प्लास्टिक में ही पैक होती है।इस पर प्रतिबंध की बात न तो सरकारें करती है। और नही जिम्मेदार लोग।एक सर्वे के अनुसारए 90 प्रतिसत से अधिक खाने पीने की वस्तुएें पॉली पैक होती है।इसके विकल्प के तौर पर कुछ भी अभी तक सामने नहीं आया है।