रुद्रप्रयाग : पालाकुराली गांव में नवविवाहिता की खुदकुशी का मामला, ससुराल पक्ष ने दहेज उत्पीड़न के आरोप को बताया बेबुनियाद

ईश्वर उषा की आत्मा को शांति प्रदान करें एवं उषा के मायके एवं ससुराल दोनों परिवारों को इस दुखद घड़ी को सहन करने की शक्ति दें ।

जिस बेटी उषा का उसके माता पिता ने बीस वर्ष तक उसका पालन पोषण किया हो एवं पढ़ा-लिखाकर उसकी शादी की हो और शादी के चौथे महीने में ही बेटी ने फांसी लगा कर अपना जीवन समाप्त कर दिया हो, उनके दिल पर क्या बीत रही होगी इस बात को माँ बाप ही महसूस कर सकते हैं। ऑर हम सब भी समझ सकते हैं ।

लेकिन इस दुखद घड़ी में ससुराल में भी मातम का माहौल है । एक सप्ताह होंने को है, अभी भी मृतक की सास का रो रो कर बुरा हाल है । घर के सभी सदस्य (सास, ससुर, पति, ननद और दादी) अभी तक सदमे में हैं । पूरा गाँव असमंजस की स्थिति में है ।

मृतक उषा ने स्वयं फाँसी लगाकर ख़ुदकुशी क्यों की यह जाँच का विषय है. किंतु ससुराल पक्ष पर जो दहेज उत्पीडन एवं हत्या के जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे बिल्कुल बेबुनियाद हैं इसका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है।

मृतक उषा को ससुराल की ओर से कोई परेशानी नहीं थी और ना ही ससुराल वालों को अपनी बहु उषा से । उसे अपनी बेटी जैसा लाड़ प्यार मिलता था । सास बहु सहेलियों की भाँति रहा करती थी। पति-पत्नी भी आपस में बहुत प्रेम से रहा करते थे, अपनी बहु के गर्भवती होने की खबर से पूरे परिवार में खुशी का माहोल था ।

यह घटना रविवार,दिनांक २७ सितंबर २०२० सुबह की है इसके पहले दिन शनिवार दिनांक २६ सितंबर को दोपहर लगभग 12 बजे उषा की माता जी श्रीमती सुनीता देवी, ग्राम बधाणी, पट्टी बाँगर भी अपनी बेटी के घर आई थी उनके साथ उनका छोटा पुत्र अमित भी था ।
सभी ने एक साथ बैठकर दोपहर का भोजन किया और उसके बाद उषा, उषा की सास, और उषा की माँ तीनों एक साथ खेतो मे काम करने गयी। उषा की माँ  सुनीता देवी यह कह रही थी कि तुम्हारे गाँव मे काम थोड़ा ज्यादा है, मेरी बेटी से इतना काम नहीं हो पाएगा। इसी बात को लेकर हल्की बहस भी हुई और सभी शांत हो गए ।
घर आने के बाद सभी परिवार जनों ने एक साथ हंसी खुशी के साथ रात्रिभोज किया जिसमें कि मृतक उषा की माता जी भी शामिल थी, तत्पश्चात् सभी ने साथ बैठकर अनुज एवं उषा की शादी की वीडियो देखने लगे सभी खुश थे। अनुज एवं उसके पिता वेडिओ ना देखकर अपने-अपने कमरे मे सोने चले गए । वीडिओ देखने के पश्चात सभी अपने अपने कमरे मे जाकर सो गए।

सुबह उषा की माताजी का मूड कुछ ठीक नहीं था लग रहा था वह इस बात को लेकर नाराज़ थी कि उषा के ससुराल मे खेत-खलियान एवं जंगल का काम ज्यादा होता है । और यह भी कह रही थी कि मेरा दामाद मेरे साथ नहीं बैठा, इतनी छोटी सी बात पर अपने दामाद अनुज को भला-बुरा कहने लगी और बिना मिले ग़ुस्से अप-शब्द कहते हुए घर से चली गई और कहा कि आज के बाद मैं इस घर में कभी भी नहीं आऊँगी। यह बात मृतक उषा भी सुन रही थी, उसको उनके व्यवहार से बहुत दुख हुआ, उषा को अपनी माँ की कोई बात इतनी चुब गई कि वह कुछ देर बाद घर से बिना बताए अकेले ही जाने लगी उस समय अनुज (उषा का पति ) बाथरूम मे था और सास व ननद गौशाला मे और ससुर जी तो हमेशा की तरह सुबह पाँच बजे अपनी दुकान खोलने दुगड्डा चले गए थे। जाते हुए उसे केवल दादी ने देखा, पूछने पर उसने कहा कि “मै घास के लिए जा रही हूँ” ।
जब अनुज बाथरूम से आया तो देखा कि घर पर केवल दादी है वह भी गौशाला गया ऑर अपनी माँ से पूछा कि उषा कहाँ है । उन्होने कहा कि घर पर ही होगी , इसके बाद अनुज ने अपनी पत्नी उषा को फोन किया, फोन पर उषा ने बताया कि वह घास के लिए नगदेऊ जा रही है ।
उसके बाद अनुज भी अपनी दुकान की ओर जाने लगा, इसके कुछ देर बाद उषा की सास भी बहू के साथ के लिए नगदेऊ घास के लिए चल पड़ी, इसी दौरान ऊषा ने अनुज को फोन किया और रोते रोते बोली कि माँ ने घर मे ऐसा कलेश क्यों किया होगा, अनुज ने कहा कि चिंता मत कर सब ठीक हो जाएगा मै ससुर जी से बात करता हूँ, उषा ने कहा कि मैंने पापा से बात कर ली है और सब कुछ बता दिया है, फिर अनुज कहा कि कोई बात नहीं जल्दी घर आ जाना, उषा ने कहा कि मै घास काटकर तुरंत घर आती हूँ ।

जब उषा की सास नगदेऊ पहुंची तो उषा को खेतो एवं आसपास के जंगल मे ज़ोर-ज़ोर से आवाज लगाकर ढूंढने लगी कहीं न मिलने पर उन्होने अपने बेटे अनुज को फोन किया और बताया कि उषा नहीं मिल रही है, अनुज ने फोन काटकर अपनी पत्नी उषा को दो बार फोन किया लेकिन उषा ने नहीं उठाया, अनुज घबरा कर दुगड्डा (दुकान) से नगदेऊ की ओर तेजी से चलने लगा, रास्ते से अपने ससुर जी को भी फोन किया कि उषा फोन नहीं उठा रही है उसको आप फोन करो, उसके बाद उषा के पिताजी ने भी उषा को फोन लगाया पर उषा ने नही उठाया, फिर उन्होने वापस अनुज को फोन किया कि वह फोन तो नहीं उठा रही है पर आप चिंता मत करो आप आराम से जाओ वहीं कहीं होगी। अनुज तेजी से अपने घर पाहुचा और अपने चचेरे भाई सचिन को साथ लेकर नगदेऊ की ओर दौड़े, नगवेऊ पहुचने पर उषा की सास, अनुज और सचिन तीनों ऊपर जंगल की ओर उषा को ढूंढने लगे, ढूंदते हुए लगभग 5-10 मिनट मे ही सचिन को उषा एक पेड़ पर लटकी हुई दिखाई दी यह देख कर उसके होश उड़ा गए, उसने तुरंत अनुज को आवाज लगाकर पास बुलाया यह देखकर अनुज के पैरो तले ज़मीन खिसक गई और अपनी माँ को आवाज लगाकर वहाँ पर बुलाया, यह देखकर उषा की सास बेहोश होकर वहीं गिर पड़ी। इसी समय अनुज के फोन पर उषा के पिताजी का फोन आया और अनुज ने सारा मंजर अपने ससुरजी को बता दिया । उस समय लगबघ सुबह के 11 बज रहे थे ।
उसके बाद सचिन ने परिवार वालो को फोन कर सूचना दी, और अनुज ने अपने पिता जी को फोन पर खबर दी ।

उषा ने फांसी लगा कर आत्महत्या क्यों की है इसकी जांच की आवश्यकता है दोषी को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन किसी निर्दोष पर झूठे आरोप लगाकर उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ बिलकुन नहीं होना चाहिए ।

परिवार पर लगे दहेज उत्पीड़न एवं हत्या का आरोप बिलकुल निरधार है, इस घटना की निस्पक्ष जांच होनी चाहिए।