“पद्म श्री”‘ बसंती बिष्ट क्यों है देश की प्रथम महिलाओं में सुमार?

विभिन्न क्षेत्रों में विशेष कायों को अंजाम पर पंहुची देश की 112महिलाओं में प्रथम महिलाओं में सुमार “पद्म श्री” जागर सम्रागी बंसती देवी बिष्ट ने यह प्रतिष्ठा हासिल कर न सिर्फ देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड राज्य का मान बढाया है बल्कि पूरे देश में अपनी नई पहिचान बनायी है। नंदा के पंम्परागत जागर परंम्परागत तरीके से गाकर जागर विधा में पुरूष प्रधानता की बेडियों को तोड समाज को नई दिसा और दशा से अवगत कराया है।


बसंती बिष्ट उत्तराखंड की पहली एवं एक मात्र महिला मुख्य जागर गायिका है।अलिखित 500 से भी अधिक विभिन्न प्रकार के लोक गीतों पर मौलिक कार्य कर इन विधाओं को पुर्नजीवित किया। मूल रूप से चमोली जनपद क्षेत्र के देवाल की  पांचवी कक्षा तक पढाई करने वाली पहली महिला है।13 वर्ष की आयु में आपने ‘ग्राम -लक्ष्मी’ तथा वर्ष 1996 में प्रथम महिला ग्राम प्रधान के रूप में दबे-पिछडे़,महिला एवं बाल विकास,वन पंचायत के लिए कार्य किया। श्रीमती बिष्ट ने खेती-बाड़ी और पशु पालन से भी जुड़ी रही। साथ ही उत्तराखंड आन्दोलन में जन गीतों एवं महिला जन जागृति कर सक्रिय भूमिका निभाई है। इन सब सर्धषों को देखते हुऐ भारत सरकार ने उन्हें “पद्म श्री” पुरस्कार से सम्मानित किया है।

-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून।