ओएनजीसी भी गुपचुप कर रहा पलायन

कई विभाग दिल्ली में हुए शिफ्ट
– कई और विभागों के बदलाव की तैयारी
– स्थानीय युवाओं को रोजगार देने से कतरा रहा है ओएनजीसी

देहरादून समेत उत्तराखंड की शान कहे जाने वाले आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन लिमिटिड यानी ओएनजीसी में सबकुछ ठीक नहीं है। एक ओर यहां आउटसोर्स के साथ शोषण के समाचार आते हैं तो दूसरी ओर प्रबंधन गुपचुप तरीके से कई विभागों को दिल्ली शिफ्ट कर रहा है। जबकि देहरादून ओएनजीसी का हेडक्वार्टर है। विभागों के शिफ्ट होने से यहां के कर्मचारियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि विभागों को इसी तरह से देहरादून से दिल्ली या मुंबई शिफ्ट किया जाता रहा तो स्थानीय लोगों को रोजगार में दिक्कत होगी।
सूत्रों के मुताबिक हाल में आडिट, कारपोरेट बजट मुबंई और फिर दिल्ली, इनकम टैक्स व अन्य विभागों को दिल्ली ले जाया गया है। सू़त्रों के अनुसार कारपोरेट इनकम टैक्स, कारपोरेट पे रोल सेक्शन को यहां से देहरादून से दिल्ली या मुंबई ले जाने की तैयारी है। इसका सबसे अधिक खमियाजा उत्तराखंड के युवाओं को भुगतना होगा। यहां अप्रेंटिसशिप करने की चाह रखने वाले युवाओं को भी मौका नहीं मिलेगा और रोजगार तो कतई नहीं। यह बात दीगर है कि ओएनजीसी में आखिरी बार 2013 में भर्ती हुई लेकिन उत्तराखंडी युवाओं को इसमें तवज्जो नहीं दी गई क्योंकि अधिकारी वर्ग साउथ इंडियन या आसाम के थे।

यह गौरतलब है कि देहरादून में ओएनजीसी देहरादून में नियमित तीन हजार से भी अधिक कर्मचारी काम करते हैं। इसके अलावा यहां दस हजार करीब ओउटसोर्स और अप्रेंटिसशिप कर्मचारी हैं। यहां ग्रीन बिल्डिंग है और केडीएमआई और जियोपिक जैसी इकाई हैं जो कि तेलशोधन और संसाधनों के विकास में निरंतर अग्रसर है। ओएनजीसी देश के नवरत्न में शामिल है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार को ओएनजीसी की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए वरना प्रबंधन यहां से अधिकांश विभागों को मुंबई या दिल्ली ले जाने की फिराक में है।