साख का सवाल बने निकाय चुनाव !होगा महामुकाबला।

लालाओं की अनदेखी से बीजेपी पर मंडराया भीतरघात का खतरा।


देहरादून:मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की साख का सवाल बन चुकी देहरादून मेयर की हाॅट सीट पर उनके करीबी सुनील उनियाल गामा का भले ही आज नांमकन हो चुका हो लेकिन बीजेपी के वैश्य समाज में टिकट कटने की टीस दबी -दबी ही सहीं पर दिख अवश्य रही है। वीजेपी महानगर कार्यालय से गामा के नामाकंन के लिए कार्यकत्ताओं के साथ कुछ बडे नेता जरूर दिखे लेकिन सत्ताधारी पार्टी का रूतवा देखने को नहीं मिला।मुख्यमंत्री रावत ने भले ही यह जाता दिया हो कि जो उनके साथ बुरे वक्त का साथी रहा हो उसको वक्त आने पर तोहफा जरूर मिलता है।लेकिन पहले ही निशंक, कोश्यारी,खंण्डूरी गुटों का सामना कर रहे सीएम रावत को अब लाला ग्रुप के अलावा विरोधी दलों का प्रहार भी झेलना होगा ।यानी कि सीएम रावत को विरोधियों से ज्यादा खुद की पार्टी का अंन्दर से विरोध झेलना पड सकता है। भाजपा महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल के बगावती तेवर अतिक्रमण हटाओ के दौरान भी जाहिर हो चुके है।वही अब टिकट न मिलने से वो बैखलायें से नजर आ रहे है।कांग्रेस का मेयर प्रत्यासी पूर्व मंत्री रह चुके दिनेश अग्रवाल होने की वजह से भी गामा को जबरदस्त टक्कर मिलने वाली है।दो बार मेयर का चुनाव लड चुकी मैडम रजनी रावत एक वार फिर मैदान मै होने की वजह से किसी का भी समीकरण विगड़ सकती है।वहीं जगमोहन मेंहदीरत्ता को विभिन्न कर्मचारी संगठनों का सहयोग व पंजावी व बैश्य समाज में अच्छी पकड़ होने की वजह से भाजपा व कांग्रेस प्रत्यासियों का चुनावी समीकरण विगड़ने की पूरी संभावना है।
बहरहाल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले निकाय चुनाओं की जीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।जो मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की शाख का सवाल बन चुका है। देखने वाली बात यह होगी कि सीएम रावत विरोधी पार्टी के अलावा अपनी पार्टी के अंन्दर का विरोध को पार कर निकाय चुनाओं की नय्या कैसे पार लगते है।
-भानु प्रकाश नेगी, देहरादून।