नैनबागः नारायणी उद्यान पाव स्मेणी बना बागवानी की मिसाल

नैनबाग:
मोहन थपलियाल


बागवानी के क्षेत्र में नारायणी उद्यान पाव स्मेणी ने बंजर व उबड़ खाबड़ जमीन पर कई प्रज्जातीयों के फलदार पेड़ लगाकर उद्यान के रूप में रोजगार स्थापित किया है। जिसमें इसी की तर्ज पर क्षेत्र के कई युवाओं ने बागवानी को अपना कर पलायन को मात देकर रोजगार हासिल कर रहे हैं।
जनपद के प्रखड जौनपुर नैनबाग में उद्यान की उपार सम्भाबनाएं ह्रै। पड़ोसी राज्य हिमाचल की तर्ज में पर विषम जलवायु के बाद भी कृषक कुंदन सिंह पवार ने वर्ष 1996 में समुन्द्र तल से 4 हजार फिट की उंचाई पर ढाई सौ हैक्टर भूमि पर 250 पौधों का रोपण के साथ शुरुआत की।
धीरे धीरे कृषक कुंदन सिंह पवार ने कड़ी मेहनत और लगन के साथ वर्तमान में आडू ,सेब, खोमानी,
क्यूबी, पूलम,आखरोट, आम, नाशपत्ती,न्यूट्रोन सहित लगभग 1000 पोथों का के साथ वर्तमान बगीया में 3 सौ फलदार देने के साथ उद्यान के क्षेत्र में लगातार अपनी कामयाबी हासिल करते आ रहे हैं ।
नारायणी उद्यान फलों की मिठास प्रदेश व देश में हर साल मांग बढती जा रही है। आज कल में आडू फल भारी मात्र मंसूरी ,देहरादून में आए दिन 2600 कैरेट बिकने के बाद मांग बढ़ रही है।
उद्यान के क्षेत्र में काफी सफलता पाने पर वर्ष 2005 में उद्यान पंडित का दर्जा देकर सरकार ने उद्यान के क्षेत्र में कुन्दन सिंह पंवार को सम्मानित किया गया।
जिस पर नारायणी उद्यान हर साल लाखों रुपये की अच्छी खासी आमदानी कमाने में सफल हो रहे ।
इस उद्यान की कामयाबी व सफलता को देखते क्षेत्र व प्रदेश भर से समय-समय पर जानकारी लेने के लिए प्रशिक्षण दल पहुंचे है।
उद्यान पंडित का सम्मान के बाद क्षेत्र के युवाओं ने .सीख लेकर स्वयं के संसाधनों से पलायन की मात देकर वागवानी को रोजगार का रूप में आगे बढ रहे है।