नशीले पदाथों की गिरफ्त में देश का युवा !


-भानु  प्रकाश नेगी


व्यसन न केवल एक विचलित व्यवहार है अपितु एक गम्भीर सामाजिक समस्या भी है। तनावों, विशदों, चिन्ताओं एवं कुण्ठाओं से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति कई बार असामाजिक मार्ग अपनाकर नशों की और बढ़ने लगता है, जो कि उसे मात्र कुछ समय के लिए उसे आराम देते हैं।युवाओं में बड़ते मादक द्रव्यों के प्रचलन और उनके दुस्प्रभावों से युवाओं का भविष्य अन्धकार की ओर बड रहा है। मादक द्रव्य के सेवन और उनके व्यापार के विरोध अन्तराष्ट्रीय दिवस पर क्या है मादक दव्यों के दुस्प्रभाव –
-व्यसन का अभिप्राय शरीर संचालन के लिए मादक पदार्थ का नियमित प्रयोग करना है।अन्यथा शरीर के संचालन में बाधा उत्पन्न होती है।तनाव,कुन्ठाओं,चिन्ताओं के छुटकारे के लिए इसे युवा शौक में सुरू करता है लेकिन यह जब यह शरीर में अपना प्रभाव डालन शुरूकर देता है तो इसके बिना रहना नामुकिन सा होता है। नसे की गिरफत में फंसे युवा मनमीत कहते है कि मेरे नसे की दुनियां मे प्रवेश कलब में स्नूकर खेलते हुई,नसे के लिए पहले घर से पैसे लिए,फिर पड़ोसी से पैसे लिए फिर घर के सामान को बेचना शुरू किया फिर सट्टे से पैसा लगाना शुरू कर दिया। मैने अपने नसे में कोकिन,चरस,गांजा,कोकिन इंजेक्सन आदि लेने शुरू कर दिया था। जब नसा नहीं मिलता तब उस वक्त लगता था कि जीने से अच्छा मर जाना सही है।वही दोस्तों के साथ खेल की पार्टी से शराबी बने युवा बीरेन्द्र नाथ का कहना है कि मैंच जीतने के बाद दोस्तो की जिद से शराब पीनी शुरू की और पांच साल तक पता नहीं चला कि कब जमीन बिक गई,कब अपनी दुकान किराये पर चली गई।


नसा पहले शौक और बाद में मानसिक रोग बन जाता है,जिससे पीछा छुड़ाना काफी मुस्किल हो जाता है। मनो चिकित्सको की मानी तो मादक दव्य विरोध दिवस मनाने का उद्देश्य यह है कि युवाओं में बड़ते नसे के प्रभाव को कैसे कम किया जाय इस पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। हमारी ओपीडी में आने वाले रोगियों में सबसे ज्यादा शराब से पीड़ित युवा है।नसे की शुरवात पार्टी से होती है।और फिर यह बडता जाता है। नसा हमारे समाज में आसानी से मिल जाता है,इसलिए युवा इसकी गिरफत में जल्दी आ जाता है और वह इसका आदी हो  जाता है।नसे की रोकथाम के लिए स्कूल व सार्वजनिक स्थलों पर जन जागरूकता कार्यक्रम होने आवश्यक है।                  -डॉ निशा सिग्ला,मनोरोग विशेषज्ञ


-नसे का कारोबार हमारे समाज में अपनी बहुत गहरी जड़ें जमा चुका है।वरिष्ठ एम डी मेडिसिन एवं फीजिसियन डॉ एन एस बिष्ट का कहना है  कि नसे के आदी लोग इसे विभिन्न तरीके से करते हैं जिसमें नसे की गोलियों,नारकोटिक ग्रुप की दवायें,सिलीपिंग ड्रग,इन्जेक्सन से लेते है। समाज में सराब के प्रचलन से यह सबसे ज्यादा नुकसान पंहुचाने वाला नसा बन गया है। शराब से मुहूं से लेकर सांस की नली तक के कैन्सर के साथ साथ,यह लीबर को भी खराब करता है।इससे होने वाले रोगों में डायविटज,मानसिक रोग,टीबी,आदि बीमारियां हो जाती है। जिससे रोगी की असमय मृत्यु हो जाती है।


नसे के कारण न सिर्फ युवाओं का भविष्य अन्धकारमय हो रहा है,बल्कि यह समाज व राष्ट्र दोंनों के लिए हानिकारक है।साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से यह विभिन्न बीमारियों का भी कारक है।शराब समाज की वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है जिसकी जडे़ उखाडना काफी मुस्किल काम है। जरूरत इस बात की है कि नशे को राष्ट्रीय समस्या घोषित कर धरातल पर काम किया जाय ताकि देश के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह न लग सके।