उत्तरकाशी:ड्डंडा में अफीम की खेती का भण्डाफोड़।

 

उत्तरकाशी विकास खंड डुंडा में स्थित-गाजणा पट्टी के आधा दर्जन से अधिक गांवों में इन दिनों खेतों में अवैध रूप से उगाई गई अफीम की फसल।
बेरोजगारी के चलते नियमों को ताक पर रखकर अफीम की खेती करने पर मजबूर गांव के ग्रामीण।
शासन व प्रशासन द्वारा नहीं की जा रही है इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई के चलते लगातार नशीले पदार्थों की की जा रही है खेती।
नशीले पदार्थों की खेती होने से आसपास के ग्रामीणों में काफी रोष।

प्रतिबंध के बावजूद गांवों के ग्रामीणों और बेरोजगारों के लिये अफीम की खेती वरदान साबित हो गई है।
ऐसा इसलिए क्योंकि इन गांवों के कई बेरोजगार चरस के अवैध धंधे से जुड़कर रातों रात बड़े पैमाने पर कारोबार किया जाता हैं । हाल ही मैं नार्कोटिक्स ब्यूरो की टीम दिल्ली से उत्तरकाशी अवश्य पँहुची मगर गाजणा पट्टी की ओर टीम का ध्यान नही गया ।
धौंतरी स्थित स्थानीय प्रशासन की मिली भगत से क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की तस्करी हो रही है।

डुंडा ब्लॉक के सिरी,भैंत,ठाडी कमद,कुमारकोट,भड़कोट,बागी, समेत आसपास के गांवों और तोकों में पिछले कई सालों से भांग की अवैध खेती की जा रही है।
ग्रामीण अपने खेतों के आसपास भांग उगाते हैं और बाद में इसी अफीम से चरस तैयार कर उसे गुपचुप तरीके से बाजार तक पहुंचा देते हैं।
सूत्रों के अनुसार जानकारी मिली की यहां लंबे समय से हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ खरीददार पँहुच रहे हैं।
कुछ ग्रामीणों ने इस कार्य के लिए गांव के ही बेरोजगारों को दैनिक मजदूरी पर रखा हुआ है।
उन्होंने यह भी बताया कि गांव में अफीम के सेवन से कई नौजवान पागल भी हो चुके है।
सूत्र बताते हैं कि जिन लोगों को अफीम से चरस निकालने के काम में लगाया गया है उन्हें मजदूरी के अलावा दोपहर का खाना और आखिरी हाथ की चरस भी दी जाती है। इन गांवों में कई बेरोजगार युवा आजकल इसी काम में लगे हुए हैं।  गांव मैं हो रहे नशीले पदार्थों की खेती से आसपास के गांव के ग्रामीणों में काफी रोष है लोगों का कहना है कि जल्दी-जल्दी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो गांव के नौजवान पीढ़ी नशे की लत में घिर जाएगी