नसा नही रोजगार दीजिए जनाब!

प्रदेश के युवाओं को नसे ने किस कदर अपन आगोश में ले लिया है इसकी बानकी सर्वे चौक के पास बीयर व देशी शराब की दूकान के बाहर पडे इन युवको को देखने से लग जाती है।ऐसी तश्वीरें शहर के अंदर और बाहर आम तौर पर देखने को मिल जाती है। और दिखे भी क्यों नही जब खुद सरकार ही नशे के कारोबार को अधिक से अधिक बडावा दे रही हो! तो, फिर कौन इन युवाओं को इस नर्क में जाने से रोक पायेगा।

यूं तो कहने के लिए उत्तरखंड देवभूमि कहा जाता है लेकिन प्रदेश में जिस कदर नशे के काले कारोबार से लेकर तमाम प्रकार के कुकृत्यों में दिनों दिन बढोत्तरी हो रही है उससे से यही लगता है कि,आने वाले समय में यह देवभूमि की जगह असुरों की भूमि न बन जाय।
नशे के कारोबार को जिस तरह से अभी तक सभी सरकारें प्रोत्साहित करती रही है,इतना ही नही प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में घर-घर तक पंहुचानें का काम करती रही है,उससे सरकारों की मंसा साफ झलकती है कि युवाओं को नशे से बर्वाद किया जाय।
सरकार की सह पर फल फूल रहे नसे के काले कारोबार को जल्द बंद नही किया गया तो आने वाला समय बहुत भया वाह होना तय है,साथ ही आने वाली पीडी के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह लग जायेगा।सरकार को चाहिए नसे का विकल्प ढूडकर युवाओ को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करें।ताकि उत्तराखंड का भविष्य सुरक्षित हो सके।