मायानगरी मुंबई में गुंजा सुप्रसिद्ध लोकगायिका रेखा धस्माना के सतरंगी सुरों का जादू।

गढ़वाल भ्रातृ मंडल मुंबई के 90 साल पूरे होने पर संस्था ंद्वारा आयोजित “मुंबई उत्तराखंड महोत्सव“ की सुरमयी शांम में उस समय रंगीन हो गई जब सुप्रसिद्व लोक गायिका रेखा धस्माना उनियाल  ने अपने सुरीले कंठ से गाना शुरू किया।21 से 23 दिसंबर को आयोजित किये गये इस महोत्सव में उत्तराखंड के कई लोक गायक व गायिकायें ने भी संमा बांधा।गढ़वाल भ्रातृ मंडल संस्था देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सबसे पुरानी संस्थाओं में सुमार है। जो उत्तराखंड की लोक संस्कृति, विरासत,परंपरा लोक कला,लोक संगीत,लोक नृत्य,धर्म व आध्यात्म के लिए समर्पित है।
प्रमोद महाजन कॉम्पलेक्स चीकु वाडी,बोरीवली(पश्चिम)मुम्बई में आयोजित संगीतमयी संध्या में लोकगायिका रेखा धस्माना उनियाल ने कार्यक्रम की शुरवात “धरती हमारा गढवाल की कतिगा रैतेली स्वाणी च“ से किया,इसके साथ ही “दर्जी दिदा मेरी अंगडी सिले“ गाया, जिस पर पूरा पंडाल झूम उठा।युगल गीतो में विशन सिंह हरियाला के साथ “ओ भीना कस के जाणुं द्वारहटा“ ने कुमाउ अंचल की याद दिला दी जिस पर दर्शक जमकर थिरके।देर रात तक चले कार्यक्रम में कई अन्य गायको ने भी कार्यक्रम में संमा बंधा।
महोत्सव के दौरान पहाडी उत्पादों व खान पान के स्टॉल पर भारी भीड़ रही, जहां लोगां ने जमकर पहाडी खान-पान का लुफत उठाया,और साथ ही जमकर खरीददारी भी की।
कार्यक्रम के दौरान संस्था के अध्यक्ष भगत सिंह बिष्ट,महासचिव रमण मोहन,उपाध्यक्ष रमेश बलोदी,कोषाध्यक्ष दयानंद शर्मा,समाजसेवी राकेश उनियाल,खुशहाल सिंह रावत,मनोज द्विवेदी,प्रीतम लिंगवाल,रामसिंह धटाल, पुरोषोत्तम नेगी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून