मोटर वाईकल एक्ट 2019 क्यों जरूरी है!

मोटर वाईकल एक्ट और चम-चमाती सड़कें?

मोटर वाईकल एक्ट 2019 के लागू होते ही भारी भरकम जुर्माने की खबरें आनी आ रही है।देशभर में मोटर वाइकल एक्ट के तहत जुर्माने और सजा को कई गुना बड़ा दिया गया है ।जिसका स्वागत किया जाना चाहिये।क्योंकि सड़क दुर्धटनाओं के कारण हमारे देश में हर साल हजारों लोगों की असमय मौत हो जाती है जिसका दंश पूरे परिवार को जिन्दगी भर झेलना पड़ता है।अधिकतर मौत के कारण तेज रफ्तार,शराब व अन्य नसे की लत में गाड़ी चलाना,दोपहिया वाहन बिना हेल्मट और क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर चलाना,और समय पर गाड़ी की सर्विस न होने के कारण ब्रेक फेल,स्टेयरिंग फेल होना आदि प्रमुख हैं।
यह चिन्तनीय पहलू है कि यदि हम 75 हजार की मोटर बाईक,और कम से कम 6 लाख की कार खरीद सकते हैं तो 8 सौ रूपये 2हजार का बीमा व 1हजार का हेल्मेट नहीं खरीद सकते?
पर एक सच यह भी है कि हमारे देश में सड़कों की हालत इतनी खराब है कि पता नहीं लगता कि गड्डे सड़क में है या गड्डों में सड़क ? खराब सड़कों के कारण हजारों लोग देशभर में जान गवां देते है।जिसकी जिम्मेदारी साफ तौर पर राज्य व केन्द्र सरकार की होती है। केन्द्र सरकार के नये मोटर वाइकल एक्ट अच्छा कदम साबित हो सकता है लेकिन सबसे पहले देश की सड़कों की हालत सुधारने की आवश्यकता है।
उत्तराखंड में इस एक्ट के विरोध हो रहा है।जिसके लिए 16 सितंबर को सीटी बस,बिक्रम,टैक्सी- मैक्सी संगठनों ने एक दिन का बंद करने की घोषणा की है।मेरी दृष्टि में यह अच्छा कदम नहीं है। आधे से अधिक बिक्रम बिना परमिट के चल रहे है।वही सिटी बसों की गुण्डागर्दी जगजाहिर है।सड़क के बीचों- बीच किसी ही स्थान पर गाड़ी रोकना और सवारी उतारना चढ़ाना इनकी नियति बन चुकी है।बिक्रम के आगे की सीट पास न होने पर भी बेखौफ दो सबारी बैठाना,7सीट पास बिक्रम में 10 सवारी बैठाना।सीटी बसों के ओवर स्पीड़ व ओवर लोड़िग होकर चलना क्या नियमों के विरूध नहीं है?
सवाल पुलिस महकमें पर भी उठता रहा है कि जब भी यातायात के नियम लागू किये जाते है वह कुछ ही दिनों में फेल क्यों हो जाते है। नये सड़क नियमों को यहां लागू करने से पहले यातायात पुलिस को अपना चाल, चरित्र व चेहरा बदलने की आवश्यकता है।चालन करें लेकिन पहले सड़कों की हालत को ठीक करवायें ताकि आम जनता पर दो तरफ मार न पड़ सकें।
यह देखना भी आवश्यक है कि वाहन की लागत व समयावधि कितनी रह गई है।ताकि अनावश्यक चालन के भुगतान से छुटकारा मिल सके।

-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून।