मार्शल आर्ट्स का जीवन में महत्व.

मार्शल आर्ट्स का जीवन में महत्व

प्रस्तावना : मार्शल आर्ट्स मुख्यतः मनुष्य के शरीर एवं मन के मध्य संतुलन बनाने की क्रिया है, बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस से लाभान्वित हो सकते है | आम जन मानस में इसको लेकर यह ग़लतफहमी है की  मार्शल आर्ट्स युद्ध की विधा है, जबकि यह ध्यान की एक सक्रिय प्रक्रिया है | इस ध्यान की प्रक्रिया से मानव हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकता है | पहले हम जानते है कि मार्शल आर्ट्स की शुरुआत कैसे हुई थी |

इतिहास : भारत के एक दक्षिण के राज्य के राजा के तीन पुत्र थे, इनमे से जो पुत्र सब से छोटा था वो सब से काबिल था , और राजा उसे ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता था परन्तु दोनों बड़े भाइयो नहीं चाहते थे कि वो राजा बने | इस पर छोटा पुत्र जिसका नाम बोधिधर्म था, वो घर छोड़ कर सन्यासी बन गया और महिला गुरु प्रजन्तारा से शिक्षा ग्रहण करनी शुरू कर दी | प्रजन्तारा ने बोधिधर्म को अपनी मृत्यु के बाद बुध धर्म के प्रचार के लिए चीन भेजा | जब बोधिधर्म चीन पंहुचा तो उसने पाया कि वहा के शयोलिन टेम्पल के सन्यासी ध्यान करते करते बहुत कमजोर हो गए थे | तब बोधिधर्म ने भारतीय सक्रिय ध्यान युद्ध कला “ कलरिपट्टू “ को वहाँ के सन्यासियों को सिखाया, जो बाद शाओलिन कुंग फू के नाम से मशहूर हुआ | इस से यह बात समझी जा सकती है मार्शल आर्ट्स मुख्यतः एक कला है जो शरीर के साथ साथ मन को भी संतुलित करती है |

आज कि जरुरत : आज के दौर में जब मानव यंत्रो के वजह से, शारीरिक श्रम से मुक्त हुआ है , वही पर फेसबुक, व्हाट्स एप , टीवी, इंटरनेट आदि के माध्यम से मानव मन पर नकारात्मक  प्रभाव पड़ा है | मानव एक उर्जा का पुंज है, जो मानसिक और शारीरिक रूप में प्रगट होती है | इस  उर्जा को सकारात्मक या नकारात्मक दिशा दी जा सकती है, नकारात्मक दिशा में जाने कि वजह से ही क्रोध, लड़ाई, मारपीट, बलात्कार आदि की घटनाओ में वृद्धि होती है और सकारात्मक दिशा में जाने पर ऊर्जा सृजन, आविष्कार, नृत्य , कला , विज्ञान की तरफ ले जाती है | मानव की  यह ऊर्जा किस दिशा में संचारित हो यह आप पर निर्भर करता है , बच्चो में और युवाओ में यह उर्जा अत्यधिक होती है और इस को सही दिशा देना माता, पिता और समाज का उत्तरदायित्व है |

मार्शल आर्ट कैसे उपयोगी है : जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के लिए एकाग्रता जरुरी है, एकाग्र व्यक्ति ही पढाई में , खेल में,  नौकरी में, व्यापार में, अध्यात्म में या जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल हो पाता है | मार्शल आर्ट एक कला है जो मानव मन की एकाग्रता और शरीर का संतुलन एक साथ सिखाती है | इसे करने से शरीर लचीला और रोग मुक्त तो होता ही है साथ ही साथ एकाग्र रहने की, वर्तमान में रहने की कला भी आ जाती है | ऊपर लिखी जिस उर्जा का वर्णन किया गया है अगर वह उर्जा अपने भीतर की तरफ जाती है तो आर्यभट, नागार्जुन, कणाद, पाणिनि, पतंजलि के समान बनता है, और अगर उर्जा को बाहर कि तरफ प्रेषित करता है तो योद्धा बनता है,भारत के बड़े योद्धा मार्शल आर्ट्स के ज्ञाता थे , परशुराम को कलरिपट्टू का जनक कहा जाता है, कलरिपट्टू से चीनी और जापानी मार्शल आर्ट का जन्म हुआ , द्रोणाचार्य , कृपाचार्य , अश्वथामा, अर्जुन , भीम आदि सब मार्शल आर्ट में प्रवीण थे | उर्जा ना तो अच्छी होती है ना बुरी होती है, इसका उपयोग किस प्रकार से किया जाता है यह उसी अनुरूप हो जाती है | अगर आप में ऊर्जा है तो इसको सही दिशा देनी जरुरी है और आने वाली पीढ़ी को भी हमें सही दिशा दिखानी जरुरी है |