होम स्टे योजना को पहनाया अमली जामा,रूद्रप्रयाग जिले के अंतिम गाँव रांसी में मनाया स्थापना दिवस

अपने ही बूते पर आगे बढ़ने का संकल्प। 9 नवम्बर को सबकी तरह हमें भी कंही न कंही तो समारोहों में शामिल होना ही था।

हमने चुना केदारनाथ विधानसभा के तुंगनाथ की ओर अंतिम गांव – मक्कू को। बहुत बड़े विमर्श और लक्ष्य नही थे। हम कुछ साथी पत्रकार, पर्यटक, कलाकार, पर्यटन व्यवसायी और स्थानीय लोग एक लक्ष्य के लिए जुटे – केदारनाथ विधानसभा के मक्कू जैसे कही गांवों में पर्यटन बड़े। इसके लिए – होम स्टे योजना को जमीन पर उतारा जाए। विंटर टूरिज्म सुरु हो। जड़ों में भी यात्रियों की चहल-पहल बड़े, दिखे। सारे मेहमान गांव के घरों में रहे, खाना खाया और सुबह प्रेम व सम्मान से उसका तय किराया लिफापे के भीतर आदर से घर के बुजुर्ग के हाथों पकड़ाया। कागजों पर होम – स्टे योजना सालों से चल रही है लेकिन पर्यटन मंत्री, सचिव तो छोड़िए किसी जिले का पर्यटन अधिकारी कोई गांव / घर नहीं बता सकते जंहा पर्यटक, होटल के विकल्प के रूप में घर में रह रहे हों ।

हम केदारनाथ विधानसभा के कुछ गॉवों में “पधान जी” नाम से होम – स्टे सीरीज सुरु कर रहे हैं। पिछले साल हिटो – केदार अभियान में हमने- रांसी, निफ्टर (चौमासी) आदि गांवो में होम – स्टे के प्रयोग को शुरू कराया था। इस साल कुछ दिन पहले इंडियन नेवी के अभियान में भी मक्कू ओर भणज में होम – स्टे कराया। मक्कू में हम राज्य स्थापना दिवस के दिन एक कदम और आगे बड़े। हमारा लक्ष्य है 20 परिवारों के घरों में इस साल कम से कम 100 दिन पर्यटक ठहरें। मक्कू में 50 पर्यटक घरों में आराम से ठहर सकते हैं।

साथियों में बड़े भाई पत्रकार राजेन्द्र जोशी, गजेंद्र नेगी, चिर घुमकड उदित घिल्डियाल, ईश्वर बिष्ट, दिवाकर गैरोला, कलाकार हेमा नेगी करासी, होटल व्यवसायी ज्योति प्रकाश, फोटोग्राफर मनोज पटवाल, साहसिक पर्यटन से जुड़े धनेन्द्र नेगी, मैगपाई कैम्प के ऑपरेटर दिनेश बजवाल, सारी ओर मक्कू के कुछ कैम्प ऑपरेटर, प्रसिद्ध वर्ड वाचर यशपाल नेगी कुछ पर्यटक जिनमें एक ऑस्ट्रेलिया के अप्रवासी नवतेज सिंह थे खुसी – खुसी घरों में आनंद पूर्वक रहे। सबका अनुभव था कि – होटलों से घरों में रहना अधिक सुखद है।

अब आपको एक हप्ते के लिए कभी भी छुट्टी मनाने का मन करे तो मक्कू आइयेगा। पहाड़ के अपने गांव में। जब दिल्ली और पूरा उत्तर भारत कोहरे की चपेट में होगा – तब मक्कू सहित हमारे गाँवों में चटक धूप होगी। खटाई होगी, कोदे की रोटी – भंजीरे की चटनी होगी ओर भी समृद्ध भोजन होगा और पास में चोपता – तुंगनाथ व देवरियताल जैसे कही घूमने योग्य स्थल होंगे। साथ में जंहा ठहरेंगे उस परिवार का प्यार होगा। हमने चर्चा भी करी। निष्कर्ष एक था – ” हमें अपने दम पर आगे बढ़ कर प्रगति के कुछ “मॉडल” बनाने हैं “। इन सबको सरकारों ने अभी तक कुछ नही दिया ये सरकारों से कुछ लिए बिना भी आगे बढ़ेंगे। हम गिरेंगे – पड़ेंगे पर लक्ष्य तक पंहुचेंगे।

-मनोज रावत, विधायक केदारनाथ