महिला उत्तरजन ने किया स्त्री के सवालों पर मंथन.

विश्व लोकतंत्र दिवस पर समारोह आयोजित

-लोकतंत्र में महिलाएं पीछे क्यों? विषय पर किया मनन


देहरादून। प्रख्यात शिक्षाविद् कमला पंत ने कहा है कि लोकतंत्र वह विचार है जिसने स्त्री के सपनों को पंख दिये हैं। लोकतंत्र ने ही सबसे पहले उसे समता, मताधिकार का अधिकार, समान अधिकार तथा अन्य नागरिक अधिकार दिलाने की बात की। वस्तुतः लोकतांत्रिक चेतना आधुनिक चेतना का नया आयाम है। लोकतंत्र महिलाओं के लिए एक अवसर है, महिला उत्तरजन द्वारा अंतरराष्ट्रीय दिवस 15 सितम्बर के बहाने की आज की स्त्री की लोकतांत्रिक चेतना की पड़ताल करने व उसकी लोकतांत्रिक भागीदारी की जरूरत पर चर्चा के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया है। इस समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात समाजसेविका शैल जखमोला ने की।


नगर निगम सभागार में आयोजित इस समारोह में मंच का संचालन प्रो. मधु थपलियाल ने किया। समारोह की अध्यक्षता कर रही समाजसेवी शैल जखमोला ने कहा कि आज जब वर्ग में महिलाएं पुरुषों को चुनौती दे रही हैं तो उन्हें राजनीति के क्षे.त्र में अपनी चेतना जागरूक करनी होगी। बिना राजनीतिक चेतना के वह सही जनप्रतिनिधि का चयन नहीं कर सकती है। उम्मीद की जा रही है कि महिलाएं अब राजनीतिक क्षेत्र में भी अपनी भूमिका तय करेंगी।
आधार वक्तत्व देते हुए महिला उत्तरजन की महासचिव लक्ष्मी बिष्ट ने कहा कि लोकतंत्र महिला के सर्वाधिकार अनुकूल प्रणाली है। यही एकमात्र मंच है, जहां उसके हर प्रश्न का उत्तर और समाधान है। एक नागरिक होने के नाते महिला को लोकतांत्रिक आकांक्षाएं भी हैं। इस महिला की सामाजिक और व्यवहारिक प्रतिष्ठान में भागीदारी की बात करते हैं। उसे सशक्त भी बनाना चाहते हैं लेकिन विडम्बना है कि महिलाएं अब लोकतांत्रिक भागीदारी से बचती हैं। इतना ही नहीं लोकतांत्रिक विमर्श व चर्चाएं महिला के एजेंडे में न के बराबर है। यह लगभग सारे भारत की स्थिति है। जबकि आज अगर उसकी कोई सबसे जरूरी और वास्तविक भागीदारी होनी चाहिए तो वह लोकतांत्रिक भागीदारी होनी चाहिए। स्त्री उत्कर्ष के सारे रास्ते यहीं से निकलते हैं। लोकतांत्रिक चेतना न होने पर कोई भी समुदाय विकास की दौड़ में पीछे रह जाता है।


रुद्रप्रयाग से आई महिला चेतना की पैरोकार मिली बागड़ी ने कहा कि दुनिया में महिलाओं की आबादी 3.778 बिलियन है। जो दुनिया की कुल आबादी का 49.56 प्रतिशत है और वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में महिलाओं की आबादी 58.64 करोड़ थी, जाहिर है जो अब 60 करोड़ से अधिक हो चुकी होगी। लेकिन लोकतंत्र में उनकी सहभागिता उसकी आबादी के अनुपात में अत्यंत कम है। 2014 में हुए एक सर्वे के अनुसार भारत का लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी के मामले में 108वां स्थान है। भारत में 543 सांसदों में केवल 60 महिला सांसद हैं। 1992 में लोकसभा में महिला की मौजूदगी महज 22 सीटें ही थीं यानी 4.4 प्रतिशत थी जबकि उनकी भूमिका निर्णायक होनी चाहिए। हालांकि इस प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस और बढ़ाए जाने की जरूरत है। सभागार के बाहर नारी चेतना के नारे व बैनर लगे थे।
राज्य उपभोक्ता फोरम की सदस्य वीना डोबरियाल शर्मा ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाओं विशेषकर ग्रामीण महिलाओं में राजनीतिक चेतना लाए जाने की जरूरत है। इस अवसर पर महिला उत्तरजन की अध्यक्ष डा. गीता बलोदी ने महिला उत्तरजन के बारे में बताया। उत्तरजन के केंद्रीय सदस्य डीसी नौटियाल ने भी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तरजन के प्रधान महासचिव विजय जुयाल, उत्तरजन टुडे के संपादक पीसी थपलियाल, प्रेमलता सजवाण, शिवानी पेटवाल, लोकेश नवानी, सवाल सामाजिक संस्था, प्रकृति संस्था और शिल्पा प्रोडक्शन के पदाधिकारी, सुधा ममगाईं, वीना कंडारी, कुसुम भट्ट, दीपिका भंगारी, उमा सिसोदिया, आशा पैन्युली, लक्ष्मी थपलियाल, रक्षा पांथरी, शिल्पा भट्ट बहुगुणा, हरीश राणा भी मौजूद थे।